अधिक मास में न लगा मेला और न हुई शाही स्नान, पूरा महीना वीरान रहा राजगीर

रिपोर्ट : ब्यूरो, राम विलास, नालंदा, बिहार।
राजगीर;-नवरात्रि शुरू होने से एक दिन पहले ही अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) शुक्रवार को समाप्त हो गया। अधिक मास शुरू होने के दिन राजगीर के ब्रह्मकुंड क्षेत्र में गाड़ा गया धर्म ध्वज को हिला कर तीर्थ पुरोहितों द्वारा अधिक मास समाप्त होने की घोषणा भी कर दी गयी है। धर्म और अध्यात्म की पुरातन धरती, तीर्थ शिरोमणि राजगीर में अधिक मास इस वर्ष कई मायनों में यादगार रहा।

अधिक मास के अवसर पर केवल राजगीर में आदि अनादि काल से मलमास मेला का आयोजन किया जाता है। लेकिन वैश्विक महामारी कोविड- 19 बढ़ते प्रभाव के कारण इस वर्ष मेला के आयोजन पर बिहार सरकार द्वारा रोक लगा दी गई थी। इस बार न सर्कस -थियेटर लगे न बाजार बसाया गया। तीर्थ यात्रियों से गुलजार रहने वाला सुप्रसिद्ध गर्म जलकुंड और मलमास मेला क्षेत्र पूरा महीना वीरान रहा। यदि मेला का आयोजन होता तो भीड़ जमा होना लाजिमी थी। और भीड़ जमा होती तो स्वाभाविक तौर पर सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन पुलिस और प्रशासन के बस से बाहर हो जाती ।

तब वैश्विक महामारी कोरोना का प्रभाव चरम पर हो सकता था। इसी संभावना से बचने के लिए शासन- प्रशासन द्वारा यह कदम उठाया गया था। भीड़ से बचने और सामूहिक रूप से कुंड स्नान पर रोक लगाने के कारण ही सरकार के आदेश पर जिला प्रशासन द्वारा राजगीर के सुप्रसिद्ध गर्मजल के कुंडों में ताला जड़ दिया गया था, ताकि कोई चाह कर भी कुंड स्नान नहीं कर सके। हालाँकि बीच में गंगा यमुना और मार्कण्डेय कुंड को प्रशासन द्वारा स्नान के लिए खोल दिया गया था, जो अंत तक खुला रहा।

पहली बार साधु-संतों- महंतों का अधिक मास में शाही स्नान तक बर्जित किया गया। अधिक मास के आरंभ में होने वाले ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल होने से भी साधु समाज को प्रशासन द्वारा रोका गया। न बांस रहेगी और न बांसुरी बजेगी बाली कहावत के अनुसार सरकार ने मेला का आयोजन पर रोक लगायी थी। न मेला लगा और न भीड़ जमा हुई। न भीड़ हुई और न सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की धज्जियां उड़ी । अधिक मास में चोरी चुपके सप्तधारा और ब्रह्मकुंड में स्नान करने की चर्चा भी होते रही, जिसे पंडा कमेटी और अनुमंडल प्रशासन द्वारा महज अफवाह बताया गया।

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