अपने ही दल के कैंडिडेट से उपेक्षित हैं कांग्रेसी दूसरे जिले से लिफ्ट कर लाए गए हैं कैंडिडेट

 

रिपोर्ट : ब्यूरो, राम विलास, नालंदा, बिहार।
नालंदा;-कांग्रेस आलाकमान ने नालंदा जिले के वोटों पर विश्वास किया है, लेकिन अपने दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर नहीं।इसकी चर्चा जिले में खूब हो रही है।नालंदा जिला में तीन विधानसभा सीट पर कांग्रेस चुनाव लड़ रही है।तीनों विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी नालंदा जिले के नहीं हैं।वे सभी दूसरे जिलों से लिफ्ट कर पैराशूट से भेजे गए हैं।इस बात को लेकर यहां के कांग्रेसियों में गहरी नाराजगी है।

नालंदा में सर्वत्र चर्चा है कि कांग्रेस आलाकमान को जिले के कांग्रेसियों पर भरोसा नहीं है।इसीलिए पटना, लखीसराय और दरभंगा के कैंडिडेट को नालंदा के चुनाव मैदान में उतारा गया है।अपवाद को छोड़ दें तो प्रत्याशी को विधानसभा क्षेत्र का भौगोलिक जानकारी भी नहीं है।वे दल के प्रखण्ड स्तरीय पदाधिकारियों और कांग्रेसी कार्यकर्ताओं तक को भी नहीं जानते हैं।जिले में सात विधानसभा क्षेत्र हैं. उनमें से चार विधानसभा क्षेत्र अस्थवां, बिहारशरीफ, इस्लामपुर और हिलसा से महागठबंधन समर्थित राष्ट्रीय जनता दल चुनाव लड़ रही है।

राजगीर, नालंदा और हरनौत विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे हैं।राजद सभी विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारा है, लेकिन कांग्रेस ने ऐसा नहीं किया है।कांग्रेस ने हरनौत विधानसभा क्षेत्र में लखीसराय के कुंदन गुप्ता को चुनाव मैदान में उतारा है।इसी प्रकार पटना के गुंजन पटेल को नालंदा विधानसभा क्षेत्र से तो दरभंगा के रवि ज्योति कुमार को राजगीर विधानसभा क्षेत्र (सुरक्षित) से चुनाव मैदान में उतारा गया है।यहां चर्चा हो रही है कि स्थानीय अभ्यर्थी तो जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते रहे हैं।

उस परिस्थिति में बाहरी लोग कितने खरे उतरतेंगे सवाल खड़े किए जा रहे हैं।वोटरों का यह भी मानना है कि बाहरी उम्मीदवार यदि जीतेंगे तो उनसे कहां और कैसे संपर्क स्थापित किया जा सकता है।यह भविष्य के लिए बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है।दूसरी तरफ नालंदा के कांग्रेसियों को अलग दर्द है. वे कहते हैं कि कांग्रेस प्रत्याशियों को यह भी पता नहीं है कि विधानसभा क्षेत्र में कौन-कौन कांग्रेसी कार्यकर्ता और नेता हैं।पैराशूट से आए एमएलए कैंडिडेट किसी स्थानीय कांग्रेसी को पूछने के लिए तैयार नहीं हैं।

उस परिस्थिति में जिले के कांग्रेसी असमंजस में मायूस हैं।वह करें तो क्या और न करें तो क्या कि स्थिति में हैं।यही हाल गठबंधन के छोटे दलों के साथ भी है। राजगीर के पुराने कांग्रेसी नागेंद्र प्रसाद सिंह, अरुण कुमार सिंह, रामजी प्रसाद सिंह, कहते हैं कि उम्मीदवारों के द्वारा पार्टी कार्यकर्ताओं की घोर उपेक्षा की जा रही है।वे इसका कारण बताते हैं कि पैराशूट से आए कैंडिडेट को स्थानीय कांग्रेस के बारे में एबीसीडी की भी जानकारी नहीं है।वे दावा करते हैं कि अभ्यर्थियों को प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों तक की जानकारी नहीं है।

श्यामदेव राजवंशी और राजेन्द्र चौधरी कहते हैं कि पैराशूट कैंडिडेटों को तवज्जो देना कांग्रेस आलाकमान को महंगा पड़ेगा।आलाकमान स्थानीय कार्यकर्ताओं को छोड़ बाहरी उम्मीदवारों को प्राथमिकता देती है।यही कारण है कि लंबे अरसे से नालंदा के किसी भी विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल रहा है।

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