अपनों को छोड़ दूसरे दल के कार्यकर्ताओं पर जताया भरोसा


फोटो कौशल किशोर,

रिपोर्ट : ब्यूरो राम विलास, नालंदा, बिहार
नालंदा.;-इस बार राजगीर विधानसभा (सुरक्षित) आम चुनाव में प्रमुख दलों ने अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर भरोसा करने के बजाय दूसरे दल के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर किया है।इसका उदाहरण कांग्रेस, जेडीयू, लोजपा है. जदयू ने राजगीर के निवर्तमान विधायक रवि ज्योति कुमार का टिकट इस बार काट दिया है।जदयू से वे टिकट होने के बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया है।

दरभंगा जिला के रहने वाले रवि ज्योति कुमार राजगीर से दूसरी बार किस्मत आजमाने के लिए चुनाव दंगल में उतरे हैं।उन्हें महागठबंधन समर्थित कांग्रेस ने प्रत्याशी बनाया है।पिछली बार भी राजगीर में यही हुआ था।2015 के विधानसभा चुनाव में भी इस बार की ही तरह जदयू ने अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर भरोसा नहीं किया था।इसीलिए दलीय कार्यकर्ताओं की जगह पुलिस की नौकरी छोड़कर आए रवि ज्योति कुमार को टिकट दिया गया था।

मंजू देवी,

तब वे पार्टी के साधारण सदस्य तक नहीं थे। बावजूद जदयू कार्यकर्ताओं ने उन्हें स्वीकार किया था।उस समय टिकट से वंचित जदयू के किसी कार्यकर्ता ने रवि ज्योति की तरह बगावत का बिगुल पार्टी नेतृत्व के खिलाफ नहीं फूंका था।बल्कि दल के कार्यकर्ता आलाकमान के निर्णय अनुसार रवि ज्योति के पक्ष में चुनाव मैदान में उतरे थे।जदयू ने इस बार दूसरे जिले के नहीं, बल्कि राजगीर के ही कौशल किशोर ( मणिकांत आर्य) को टिकट दिया है।जानकार बताते हैं कि कौशल किशोर कभी जदयू के साधारण सदस्य तक नहीं रहे हैं।वह खानदानी भाजपाई हैं।

रवि ज्योति कुमार

 

भाजपा पृष्ठभूमि से आने वाले कौशल किशोर के पिता हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य राजगीर से आठ बार विधायक रहे हैं।कांग्रेस और जदयू की तरह लोजपा ने भी अपने दल के कार्यकर्ताओं और नेताओं पर विश्वास नहीं किया है।लोजपा ने भाजपा की मंजू देवी पर भरोसा किया है।मंजू देवी राजगीर प्रखंड की नई पोखर पंचायत के मुखिया हैं।

 

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