आंवला पेड़ के नीचे भोजन बनाकर व परिक्रमा कर की गई पूजा अर्चना

रिपोर्ट, मो. अंजुम आलम,जमुई (बिहार)
जमुई:- कार्तिक अक्षय नवमी के अवसर पर सोमवार को सदर प्रखंड के ढंढ गांव में स्थित सिंचाई विभाग के कार्यालय में कुंआरी कन्याओं व महिलाओं द्वारा आंवला पेड़ की पूजा अर्चना की गई। इस मौके पर बड़ी संख्या में महिलाओं की भीड़ लगी रही। वहीं विभिन्न गांव से आए पंडितों द्वारा श्रद्धालुओं को कथा भी सुनाया गया। वहीं श्रद्धालुओं ने भुआ में पंडितों को धातु का गुप्त दान किया। इसके अलावा श्रद्धालुओं ने आंवला पेड़ के नीचे भोजन खिचड़ी,चोखा, दही-चूड़ा सहित अन्य भोजन बनाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया।

बता दें की पूजा अर्चना के दौरान विभिन्न गांव के पुरोहित पंडित मौजूद थे। सभी अलग-अलग जगहों पर पूजा करवाते व कथा सुनाते दिखे। वहीं कन्याओं द्वारा आंवला पेड़ का परिक्रमा कर वस्त्र के रूप में धागा लपेटा गया। वहीं ढंढ के वार्ड संख्या 6 के वार्ड सदस्य बाजो यादव की देख-रेख में पूजा अर्चना की गई। वहीं वार्ड सदस्य ने बताया कि पूर्वज से ही यहां काकन, ढंढ, सिमरिया, सोनाय, मड़वा, ताजपुर, नवीनगर, प्रतापपुर सहित एक दर्जन से अधिक गांव की कन्याएं व महिलाएं पूजा के लिए आती हैं। इस बार कोरोना को लेकर श्रद्धालुओं की भीड़ कम है। कोरोना के गाइड लाइन के अनुसार पूजा अर्चना की गई है।
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-गुप्त दान से कुरुक्षेत्र के जितना पुण्य होता है प्राप्त

प्रभाकर पांडेय, विक्रम पांडेय और रमाकांत पांडेय ने बताया कि कार्तिक के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि कुंआरी कन्याओं व महिलाओं के लिए खास होता है। विष्णु भगवान बोले कि यदि कोई कुष्मांड में जो इच्छा है और व गुप्त दान करे तो उसे कुरुक्षेत्र के जितना पुण्य प्राप्त होगा। इस लिए इस दिन कुंआरी कन्याएं व महिलाएं सोना, चांदी या अन्य द्रव्य वस्तु गुप्त दान करती हैं।

साथ ही आंवला के पेड़ का परिक्रमण कर वस्त्र के रूप में धागा लपेटती हैं। जिससे कुंआरी कन्याओं पर जो संकट आने वाला है उसके लिए लाभदायक होता है वहीं जिनकी शादी हो चुकी है उनके पति की उम्र बढ़ती है। उन्होंने बताया कि आंवला का पत्ता भोजन में मिला कर बनाया जाता है जो अमृत के समान माना जाता है। साथ ही औषधीय वृक्ष आंवला को वैज्ञानिकों ने भी गुणकारी माना है। हर दृष्टि से लाभकारी है। जिस वजह से वर्ष में एक बार आंवला पेड़ की पूजा की जाती है।

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