आज भी जल रहा है शिव पार्वती विबाह वेदी की अग्नि

रिपोर्ट;ब्यूरो राम नरेश ठाकुर।
उतराखंड;-रुद्रप्रयाग जिले में त्रियुगीनारायण नामक गाँव मेंआदि शंकराचार्य द्वारा बनाया गया त्रियुगीनारायण मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। माना जाता है कि यह वही स्थान है जहाँ भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस मंदिर के वास्तु केदारनाथ मंदिर जैसा दिखता है। इस मंदिर के गर्भगृह में लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की चांदी की मूर्ति है। इसमें बद्रीनारायण, सीता रामचंद्र और कुबेर की मूर्तियाँ हैं।

मंदिर के गर्भगृह के अंदर एक अखंड ज्योति है जिसके ठीक सामने शिव और पार्वती की नव विवाहित आशीर्वाद मुद्रा में एक मूर्ति है। मंदिर के बाहर लक्ष्मी गणेश के साथ शयन मुद्रा में भगवान विष्णु की एक शिलानुमा स्वरूप है।इस मंदिर की एक खास विशेषता यह है की मंदिर के सामने अनवरत आग जलती रहती है।लोक मान्यताओं के अनुसार यह वही अग्नि है जो सर्वेश्वर भगवान शिव एवं आदि शक्ति जगदम्वा मां पार्वती के विबाह के समय विबाह यज्ञ वेदी के लिए जलाया गया था।

राम चरित मानस सहित कई पौराणिक सनातन ग्रंथों के अनुसार, देवी पार्वती, जो हिमालय की बेटी थीं, वह भगवान शिव की पहली पत्नी सती का पुन: जन्म हैं- जिन्होंने अपने पिता द्वारा शिव को अपने यज्ञ में स्थान न देकर अपमानित करने के कारण योग अग्नि प्रकट कर अपने प्राण त्याग दिए। माता पार्वती ने भगवान शिव से शादी करने के लिए एक कठिन तपस्या की ताकि भगवान शिव को पति के रूप में पाया जा सके। ,,,वरों शम्भु न त रहुँ कुंआरी,,,भगवान विष्णु ने विवाह को औपचारिक रूप दिया और उत्सव में पार्वती के भाई के रूप में सेवा की। भगवान ब्रह्मा जी ने विवाह में आचार्य के रूप में काम किया। विवाह सभी ऋषियों देवताओं यक्छ किन्नर गन्धर्व इत्यादि की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

 

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