आत्महत्या का निर्णय मानसिक जटिल समस्या

रिपोर्ट : ब्यूरो राम विलास, नालंदा, बिहार।
नालंदा;- वर्द्धमान आयुर्विज्ञान संस्थान, पावापुरी में मानसिक रोग विभाग द्वारा ‘विश्व आत्महत्या रोको दिवस’के मौके पर आत्महत्या को रोकने के लिए एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन गुरुवार को किया गया। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ अमरदीप कुमार ने बताया कि किसी भी मनुष्य के लिए आत्महत्या का निर्णय एक जटिल मानसिक प्रक्रिया से गुजरने के बाद होता है।

इस दरम्यान वो अपने से जुड़े लोगों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मदद की गुहार जरूर लगाते हैं। लेकिन उस समस्या के प्रति असंवेदनशीलता के कारण लोग बहुत सारी जिंदगी को बचाने से चूक जाते हैं।डॉ अमरदीप ने लोगों को मानसिक स्वास्थ्य को लेकर संवेदनशील होने की जरूरत पर जोर दिया।

दुनिया में हर साल आठ लाख लोग करते हैं आत्महत्या

अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत में हर साल एक लाख 31 हजार से अधिक लोग आत्महत्या करते हैं। इसी प्रकार दुनिया में हर साल 8 लाख लोग आत्महत्या करते हैं।दुनिया में दो करोड़ इंसान हर साल आत्महत्या की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि 40 सेकंड में दुनिया में एक इंसान आत्महत्या करता है जो बहुत ही गंभीर बात है।

इस मौके पर विभाग में कार्यरत सहायक प्राध्यापक डॉ अनंत कुमार वर्मा ने बताया कि ज्यादातर आत्महत्या युवाओं और बुजुर्गों द्वारा की जाती है।उन्होंने इस उम्र के लोगों के आत्महत्या के विभिन्न कारणों पर विस्तार से प्रकाश डाला। सीनियर रेजिडेंट डॉ राजीव कुमार ने कहा कि वैसे तो आत्महत्या के पीछे विभिन्न तरह के सामाजिक और व्यक्तिगत कारण होते हैं। लेकिन मानसिक रोगों में अवसाद की बीमारी आत्महत्या का एक मुख्य कारण है . जागरूकता कार्यक्रम में डॉ ऋतुराज, डॉ अनामिका, डॉ पूजा, डॉ बिभुजीत, डॉ अमन, डॉ आशुतोष, डॉ सौरभ, मरीज और उनके परिजन शामिल हुए।

Comments are closed.