उपेंद्र कुशवाहा पर जानलेवा हमला के विरोध में बिहार बंद रहा ऐतिहासिक

रमेश शंकर की रिपोर्ट
समस्तीपुर/दलसिंहसराय: रालोसपा सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा पर प्रशासन द्वारा किए गए जानलेवा हमला एवं कार्यकर्ताओं की पिटाई के खिलाफ महागठबंधन के आह्वान पर आज आयोजित बिहार बंद दलसिंहसराय में ऐतिहासिक रहा। सुबह दस बजे से ही राजमार्ग संख्या 28 पर महागठबंधन के कार्यकर्ताओं ने रालोसपा महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश उपाध्यक्ष स्वीटी प्रिया के नेतृत्व में सरदारगंज चौक के समीप करीब पांच घण्टों तक चक्का जाम कर नारेबाजी किया।वहीं कार्यकर्ताओं की अलग अलग टोलियों ने राष्ट्रीय सचिव शशांक प्रियदर्शी एवं महासचिव राम सेवक सिंह के संयुक्त नेतृत्व में घाट नवादा, गुदरी रोड, गुदरी बाजार, मालगोदाम रोड, बिस्कोमान चौक, लोकनाथपुर के दुकानों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को बंद कराया गया। वहीँ सरदारगंज चौक के समीप जाम स्थल पर रालोसपा के प्रखंड अध्यक्ष सीताराम महतो के अध्यक्षता एवं रालोसपा के प्रदेश महासचिव राम सेवक सिंह, माकपा के अंचलमंत्री विधानचंद्र के संयुक्त संचालन में प्रतिरोध सभा आयोजित किया गया।प्रतिरोध सभा को सम्बोधित करते हुए रालोसपा महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश उपाध्यक्ष स्वीटी प्रिया ने अपने भावनात्मक अंदाज में पटना में हुए लाठीचार्ज के दौरान रालोसपा सुप्रीमो उपेन्द्र कुशवाहा के हत्या की साजिश का खुलासा करते हुए कहा कि कार्यकर्ता का सुरक्षा घेरा अगर नहीं होता तो शहीद जगदेव प्रसाद की तरह उपेन्द्र कुशवाहा भी हमारे बीच आज नहीं होते। वहीँ प्रतिरोध सभा को राष्ट्रीय सचिव रालोसपा शशांक प्रियदर्शी, राजद के प्रदेश सचिव चंदन प्रसाद सर्राफ, राजद व्यवसायी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष राजीव प्रकाश सर्राफ, राजद के जिला महासचिव महेन्द्र सिंह, मर्सरत प्रवीण, हेमलता, इंका के सत्यनारायण सिंह, माकपा की नीलम देवी, रामसेवक राय, भाकपा के शम्भू प्रसाद चौधरी, राम उदय राय, सुजीत ठाकुर, राम दयालु महतो, राम करण चौधरी आदि ने सम्बोधित किया।वहीँ बिहार बन्द के दौरान महागठबंधन की मंती देवी, अशोक रजक, मंसूर रजक, मो० फारूक,मो आरसी,वकील अहमद, सुनीता शर्मा, अशोक सिंह, शम्भू सिंह,राम विलास पासवान, सुधीर कुशवाहा, अमरकांत महतो, रतिलाल सिंह, रघुवंश सिंह, विष्णुदेव महतो, संतलाल महतो,डॉ अजित, अभिनव समीर, रंजीत कुमार, विनोद पोद्दार, आशीष सोनी, कृष्णमोहन सिंह, शिवचंद्र राम आदि कार्यकर्ता एवं रसोइया संघ की महिलाएं बड़ी संख्या में डटी रही।

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