उपेक्षा का शिकार हुआ नालंदा खुला विश्वविद्यालय अस्तित्व पर मड़राने लगे संकट के बादल


फोटो – नालंदा खुला विश्वविद्यालय का मुख्य द्वार

रिपोर्ट : ब्यूरो, राम विलास, नालंदा, बिहार
नालंदा;-मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा घोषणा के बाद भी 15 अगस्त को नालंदा खुला विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन का उद्घाटन नहीं हो सका है। इसका कारण शिलान्यास के करीब 18 महीने बाद भी विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन का निर्माण नहीं होना बताया जा रहा है। 10 एकड़ में मुख्यमंत्री द्वारा एक मार्च 2019 को शिलान्यास किया गया था।

— सीएम की घोषणा के 18 महीने बाद भी नहीं हुआ जमीन अधिग्रहण

शिलान्यास के समय ही उन्होंने इसके उद्घाटन की तिथि 15 अगस्त 2020 तय कर दिया गया था। यूजीसी के मानक के अनुसार इस विश्वविद्यालय को 40 एकड़ जमीन की जरूरत है। इसलिए शिलान्यास के समय मुख्यमंत्री द्वारा इस विश्वविद्यालय को शीघ्र ही 30 एकड़ और जमीन मुहैया कराने की घोषणा भी की गई थी। लेकिन घोषणा के करीब 18 महीने बाद भी जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई आरंभ नहीं हो सकी है। इसका कारण आवंटन का नहीं होना बताया जा रहा है।

ज्ञातव्य है कि नालंदा खुला विश्वविद्यालय बिहार का एकलौता विश्वविद्यालय है, जिसमें दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से करीब डेढ़ लाख लोगों को शिक्षा दी जा रही है। तत्कालीन मुख्यमंत्री बिंदेश्वरी दूबे द्वारा इसकी स्थापना की घोषणा ‘राजगीर नृत्य महोत्सव’ के उद्घाटन के दौरान 1986 ईस्वी में की गई थी। यह भी तय हुआ था कि इस विश्वविद्यालय का मुख्यालय नालंदा में होगा।

1987 ईस्वी में यह विश्वविद्यालय अस्तित्व में आया है। तब से अब तक यह विश्वविद्यालय पटना में ही किराए के मकान में चल रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पहल से नालंदा के महाबोधि कॉलेज के बगल में इसके लिए 10 एकड़ जमीन का अधिग्रहण पहले चरण में किया गया है। उक्त अधिग्रहित जमीन पर प्रशासनिक व एकेडमिक भवन का निर्माण की जा रही है।

जानकार बताते हैं कि किसी भी दूरस्थ शिक्षा संस्थान के निर्माण के लिए 40 एकड़ जमीन होना आवश्यक है, जो फिलहाल नालंदा खुला विश्वविद्यालय के पास नहीं है। राज्य सरकार द्वारा 30 एकड़ जमीन उपलब्ध नहीं कराने से नालंदा खुला विश्वविद्यालय के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

 निर्माणाधीन प्रशासनिक भवन
शिक्षा विभाग के निवर्तमान अपर मुख्य सचिव आरके महाजन और नालंदा खुला विश्वविद्यालय के दो कुलपति द्वारा 10 एकड़ में बन रहे भवन कार्य का अलग-अलग निरीक्षण किया जा चुका है। गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराने और निर्माण कार्य में तेजी लाने का निर्देश कार्य एजेंसी को दिया गया था।बावजूद शिलान्यास के करीब 18 महीने बाद भी केवल प्रथम तल का ही निर्माण हो सका है।

सीएम की घोषणा बाद भी 30 एकड़ भूमि अधिग्रहण नहीं, विवि अस्तित्व पर संकट के बादल

डॉ एस पी सिन्हा, कुलसचिव, नालंदा खुला विश्वविद्यालय नालंदा ने कहा की खुला विश्वविद्यालय की स्थापना बिहार सरकार द्वारा की गई है। यूजीसी के अनुसार इसके भवन निर्माण के लिए 40 एकड़ जमीन का होना आवश्यक है। सरकार द्वारा 10 एकड़ जमीन विश्वविद्यालय प्रशासनिक एवं एकेडमिक भवन के लिए उपलब्ध कराया गया है।नालंदा खुला विश्वविद्यालय द्वारा 30 एकड़ और जमीन की मांग शिक्षा विभाग से की गई है।लेकिन शिक्षा विभाग बिहार स्टेट प्राइवेट यूनिवर्सिटी एक्ट 2013 का हवाला देकर 30 एकड़ और जमीन देने से इनकार कर दिया है।

— जमीन को लेकर शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय प्रशासन आमने-सामने

विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिक्षा विभाग के जवाब पर आपत्ति जताया है। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग जिस एक्ट का हवाला दिया है। वह केवल प्राइवेट विश्वविद्यालय के लिए है।सरकारी विश्वविद्यालय के लिए नहीं।

कार्यपालक अभियंता सुनील कुमार सिन्हा ने बताया की 21 महीने में भवन निर्माण का लक्ष्य है । शिलान्यास के करीब एक साल बाद उन्हें भवन का नक्शा उपलब्ध कराया गया है। उस कारण भवन निर्माण कार्य आरंभ होने में अनावश्यक विलंब हुआ है।इसके अलावा वैश्विक महामारी कोरोना वायरस और वर्षा ऋतु से भी निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है। प्रशासनिक एवं एकेडमिक भवन के प्रथम तल का निर्माण कार्य पूर्ण हो गया है। दूसरे तल का निर्माण कार्य आरंभ किया गया है।

 

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