औषधीय और सुगंधित पौधा लगाकर किसान बनेंगे आत्मनिर्भर

रिपोर्ट : राम विलास राजगीर।
राजगीर;-चंडी मौ के पुष्कर्णी सरोवर पर बुधवार की शाम किसान, नौजवान और बुद्धिजीवियों का समागम हुआ। गांव की बात करते हुए कृषि और किसान की बदहाली तथा गांवों को आत्मनिर्भर बनाने को लेकर चर्चा, चिंतन और मंथन किया गया. ट्रेडिशनल फॉर्मिंग (परंपरागत खेती) की जगह मनी क्रॉस (नगदी फसल) उपजाने की आवश्यकता महसूस की गई. किसानों की गुणात्मक आय बढ़ाने के लिए नगदी, औषधीय और सुगंधित फसल उगाने पर जोर दिया गया. वक्ताओं ने कहा कि ईश्वर ने गांव को बनाया है, लेकिन शहर को मानव. मौलिकता गांव में है पर आधुनिकता शहर में. औरंगाबाद के प्रगतिशील युवा किसान अमरेश कुमार सिंह ने किसानों की दशा दिशा और अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए कई टिप्स दिया. उन्होंने कहा कि पारंपरिक खेती की जगह औषधीय और सुगंधित पौधा लगाकर कृषि को लाभदायक बनाया जा सकता है. इसके लिए मिट्टी के अनुसार फसल का चयन किया जाना बेहतर होगा. मेंथा, लेमन ग्रास, काला चावल, काला गेहूं आदि की चर्चा उन्होंने की. उन्होंने कहा कि मेंथा का उपयोग ठंडा तेल, साबुन, पान मसाला और दवा आदि बनाने में किया जाता है. इसी प्रकार लेमन ग्रास रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के अलावे इत्र इत्यादि बनाने में काम आता है. काला चावल और काला गेहूं को औषधि फसल बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे कैंसर, शुगर आदि की दवा तैयार की जाती है. इसका बीज दो सौ रुपये किलो मिलता है. काला गेहूं 200 रुपए किलो और उसका आटा चार से पांच सौ किलो मिलता है. नव नालंदा महाविहार डीम्ड यूनिवर्सिटी के डीन एकेडमिक डॉ श्रीकांत सिंह ने गांव की दशा और उनमें सुधार की संभावनाओं पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि गांव खुशहाल होंगे तभी समाज और देश खुशहाल हो सकेगा. समाजवादी नेता शिव कुमार प्रसाद ने पॉलिथीन बहिष्कार पर जोर देते हुए कहा कि किसान संगठित होंगे तभी गांव आत्मनिर्भर बन सकता है. गांवों को बाजारवाद से मुक्त करने पर उन्होंने जोर दिया. राजकुमार सिंह स्मृति न्यास के संस्थापक नीरज कुमार ने कहा कि किसान बिना संसाधन की खेती करने को मजबूर हैं .

इसलिए यह घाटे का रोजगार बन गया है. ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए विज्ञान आधारित खेती करने पर उन्होंने जोर दिया. प्रकृति अध्यक्ष एवं मुखिया नवेन्दू झा ने पारंपरिक खेती की जगह नगदी फसल उगाकर किसान अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकते हैं. नवनियुक्त माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ गणेश शंकर पांडेय ने जैविक खेती पर जोर देते हुए कहा कि गांव समुन्नत होंगे, तभी देश विकास करेगा. गांव ही मानवता और विकास का आधार है. संतोष कुमार ने कहा कि सकारात्मक सोच से ही गांव का विकास संभव है. गांव के विकास बिना देश का विकास अधूरा है. उन्होंने इंटीग्रेटेड फार्मिंग और एग्रीकल्चर टूरिज्म की आवश्यकता पर जोर दिया . प्रकृति सचिव राम विलास ने कहा कि किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं. गांव की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए संसाधन मुहैया कराने की जरूरत है. गांवों को केंद्र में रखकर बजट बनाने पर गाँव फिर आत्मनिर्भर बन सकेंगे. गांव आत्मनिर्भर बनेंगे तो पलायन भी रुकेगा. भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष जनार्दन सिंह ने किसानों की तंगहाली की चर्चा करते हुए कहा कि चंडी मौ के आसपास के गांवों के गर्भ में इतिहास छिपा है. गांवों में रोजगार के अवसर पैदा करने पर उन्होंने जोर दिया. कार्यक्रम का संचालन डॉ शिवेंद्र नारायण सिंह ने किया. इस अवसर पर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती, मनोज कुमार, राम नंदन सिंह, प्रशांत सिंह, परीक्षित नारायण सुरेश, अरुण कुमार, प्रशांत कुमार, रुपेश कुमार, लाल सिंह, ओंकार सिंह एवं अन्य ने विचार व्यक्त किया।

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