कवि संगोष्ठी का किया गया आयोजन,उर्दू के बढ़ावा को लेकर हुई चर्चा

रिपोर्ट,मो.अंजुम आलम,जमुई (बिहार)
जमुई:- शहर के महिसौड़ी मुहल्ले स्थिति एक निजी मकान में गुरूवार को कवि संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कवि संगोष्ठी की शुरुआत से पहले उर्दू के प्रचार-प्रसार पर भी चर्चा किया गया। इस संगोष्ठी में आसनसोल से पहुंची कवि निगार आरा और शकील अहमद शकील ने अपने तिलमिलाती व मधुर स्वर से उपस्थित लोगों को बैठने पर मजबूर कर दिया। मौके पर कवि निगार आरा ने यह इश्क की बातें है चाहत का फसाना है, जो आज शहर महफिल तुम सब को सुनाना है, ये दिल तेरी उल्फत का सदियों से दीवाना हैं, अभी फोन उसे कर के ये मुझको बताना है, दुनियां ने तुझे तेरी चाहत में दिया है जो, वह जाने तमन्ना को हर जख्म दिखाना है, गुलशन में बहारों के दिल लौट कर आये है, आंखों से तुझे मंजर ये दिखाना है सहित अन्य शायरी और गीतों लोगों की खूब वाह-वाही लूटी। जबकि आसनसोल के शकील अहमद शकील ने नेक है मेरा इरादा मत परख, मैं हूं बंदा सीधा-साधा मत परख सहित कई शायरी से लोगों को बैठने पर मजबूर कर दिया। इस अवसर पर समाजसेवी सह शिशु रोग विशेषज्ञ डा. एसएन झा और वरीय अधिवक्ता मासूम रजा ने जिले में उर्दू को आगे बढ़ाने के लिए कई बिन्दुओं पर चर्चा किया। साथ ही यह भी बताया कि नई पीढ़ी को साहित्य और उर्दू की जानकारी काफी कम है इसके लिए उर्दू की क्लास स्कूलों और कॉलेज में किया जाएगा ताकि उर्दू और साहित्य की जानकारी नई पीढ़ी तक पहुंच सकें। इस अवसर पर जुलफकार अली भट्टो, मनोज तिवारी, संतोश कुमार, जमील अहमद खान, तनवीर खान, दिनेश लाल सहित काफी संख्या में लोग मौजूद थे।

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