कारागार निर्माण के इतिहास को दोहरायेगा राजगीर

           

                 फाइल फोटो

रिपोर्ट;ब्यूरो राम विलास,नालंदा।
राजगीर;-करीब तीन हजार साल से अधिक समय बाद राजगीर में नया कारागार का निर्माण कराया जाएगा।इसके लिए सरकारी कवायद शुरू हो गयी. गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव चैतन्य प्रसाद द्वारा कारागार निर्माण हेतु भूमि चिन्हित करने के लिए नालंदा डीएम से पत्राचार किया गया है।अपर मुख्य सचिव द्वारा यथाशीघ्र स्थल चयन कर प्रस्ताव उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया है।पत्र में कहा गया है कि राज्य के कारागारों में जनाकीर्णता की समस्या है।उस समस्या के निदान हेतु राज्य सरकार ने राजगीर में 1000 बंदी क्षमता के नए कारागार भवन निर्माण का निर्णय लिया है।

1993 में राजगीर को अनुमंडल का दर्जा मिला है।राजगीर के तत्कालीन विधायक चन्द्रदेव प्रसाद हिमांशु के पहल पर मुख्यमंत्री लालू प्रसाद द्वारा अनुमंडल का दर्जा देने के साथ जून 1993 में उद्घाटन किया गया था।दर्जा मिलने के 28 साल बाद राज्य सरकार ने राजगीर में कारागार निर्माण के लिए पहल शुरू की है।राजगीर का कारागार नालंदा जिला के बिहारशरीफ और हिलसा कारागार से बड़ा होगा।अनुमंडल बनने 28 साल बाद भी राजगीर में न तो अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय है और न ही कारागार।

अनुमंडल के लोग जिला व्यवहार न्यायालय और बिहारशरीफ जेल पर निर्भर हैं।राजगीर मगध साम्राज्य की राजधानी रही है।राजधानी होने के कारण यहां पहले भी कारागार रहे होंगे।लेकिन बिंबिसार कारागार की निशानी अभी भी धरोहर के रूप में मौजूद है।इतिहासकार बताते हैं कि सम्राट बिम्बिसार ने जिस कारागार का निर्माण कराया गया था, उसी में उन्हें उनके पुत्र सम्राट अजातशत्रु द्वारा कैद कर रखा गया था।स्थानीय लोगों की मांग उठने लगी है कि सरकार राजगीर में कारागार का निर्माण करा ही रही है, तो इसे केंद्रीय कारागार के रूप में निर्माण कराये तो इतिहास अनुरूप हो सकता है।

सीओ, राजगीर मृत्युंजय कुमार ने बताया की राजगीर में कारागार निर्माण का प्रस्ताव है।इसके लिए 25 एकड़ भूमि की आवश्यकता है।अनुमंडलीय कोर्ट और कारागार निर्माण के लिए दो – तीन स्थल देखा गया है।वरीय अधिकारियों द्वारा अंतिम निर्णय लेने के बाद सरकार को प्रस्ताव भेजा जायेगा।

 

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