कालजयी है जयशंकर का चंद्रगुप्त : वैद्यनाथ

फोटो – दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन करते कुलपति

रिपोर्ट;ब्यूरो राम विलास,नालंदा।
नालंदा;-नव नालंदा महाविहार डीम्ड विश्वविद्यालय नालंदा में महाकवि जयशंकर प्रसाद की 133 वीं जयंती प्रसाद पर्व के रूप में शनिवार को मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. वैद्यनाथ लाभ ने कहा कि प्रसाद के साहित्य में भारतीय संस्कृति सम्बंधी गहरी जिज्ञासा है जो क्रमश: गम्भीरतर होती जाती है।उनकी नई दृष्टि , बिम्बधर्मिता एवं काव्य-शैली से छायावाद का उद्भव हुआ।उनके साहित्य ने भारत को पुरुषार्थ एवं नई दिशा दी।

उनके ‘ चन्द्रगुप्त’ नाटक को मंचित होते मैंने देखा है, जो कालजयी है।बीज वक्तव्य देते हुए हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. रवींद्र नाथ श्रीवास्तव ‘परिचय दास’ ने कहा कि प्रसाद का साहित्य जड़ एवं चेतन में एक ही तत्त्व देखता है।इच्छा को सर्जना एवं काम को ऊर्जा का हेतु मानता है।उनमें कर्म एवं भोग का सहज समन्वय है।उनकी रचना के मूल में मनुष्यता का अन्वेषण है। वे प्राचीन भारतीय वैभव के विलक्षण उत्खननकर्ता हैं।ध्रुवस्वामिनी नाटक में उन्होंने प्राचीनता के बहाने समकालीन चेतना की नारी की सर्जना की है।

कामायनी में प्रसाद के जीवन- निष्कर्ष एवं जीवनानुभव हैं न कि केवल कथा-वस्तु व पात्र.उनके नाटक नए रंगमंच को भी गति देने में समर्थ हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हरे कृष्ण तिवारी ने किया।उन्होंने प्रसाद को हिन्दी का गौरव बताया।उनके माध्यम से खड़ी बोली हिन्दी ने नया आकार लिया है।धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अनुराग शर्मा ने किया. इस अवसर पर डॉ. नीहारिका लाभ, प्रो. सुशीम दुबे, प्रो. राणा पुरुषोत्तम कुमार सिंह, डॉ. श्रीकांत सिंह, डॉ मिता, डॉ. विश्वजीत कुमार, डॉ. दीपंकर लामा, डॉ. रूबी कुमारी, डॉ. मुकेश वर्मा, डॉ. धम्म ज्योति, डॉ. अरुण कुमार यादव, डॉ. जितेन्द्र कुमार , रजिस्ट्रार डॉ. सुनील प्रसाद सिन्हा सहित शिक्षणेतर कर्मी, शोध छात्र अन्य एवं उपस्थित थे।

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