किसानों के हितार्थ लाए गए किसान बिल की वापसी सदन की ऐतिहासिक भूल : गणेश कुमार

रिपोर्ट;ब्यूरो राम नरेश ठाकुर, [ बिहार ]
पटना :- भारतवर्ष किसानों का देश है,किसान जितना सबल व समृद्ध होगा देश की स्थिति उतनी हीं मजबूत होगी।जगजाहिर है कि वर्तमान में भारतीय किसान विभिन्न प्रकार की समस्याओं से जूझ रहा है और सरकार से उपेक्षित भी है जो देशहित में कदापि नहीं हो सकता।केंद्र सरकार द्वारा राज्यसभा व लोकसभा से बहुमत से पारित तीन किसान बिल देशभर में लागू होने से जहां बेहतर तरीके से फसलों की उपज होना था,उपजाए अनाज की अधिकतम राशि मिलना था,बिचौलियों से मुक्ति मिलना था व अन्य लाभकारी पायदानों पर सफलता हासिल होना था।

वहीं गैरसंवैधानिक तरीके से प्रायोजित किसान आंदोलन के आगे सरकार का घुटने टेककर किसान बिल की वापसी से किसानों का सुनहरा भविष्य अंधकारमय होता नजर आ रहा है। तो दूसरी ओर किसान नेता राकेश टिकैत की अगुआई में असंवैधानिक तरीके से किसान बिल का विरोध,विरोध के नाम पर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान,यातायात बाधित करना आदि सहित विभिन्न गैरलोकतांत्रिक क्रियाकलापों को अंजाम देना साथ हीं ऐसी गैरसंवैधानिक गतिविधियों को ले केंद्र सरकार की खामोशी और निष्क्रियता भारतीय इतिहास में काले अध्याय के रूप में जाना जाएगा।

शीतकालीन सत्र के प्रारंभ होते हीं किसान हितार्थ तीनों किसान बिल की वापसी पर समता पार्टी प्रदेश मीडिया प्रभारी गणेश कुमार ने आपत्ति जताते हुए कहा कि किसान बिल की वापसी सदन की ऐतिहासिक भूल है। जिनका खामियाजा किसान सहित सम्पूर्ण भारत को वर्षों तक भुगतना पड़ेगा।गणेश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार को चाहिए कि परिस्थिति अनुकूल हो अथवा प्रतिकूल हो,किसान बिल लागू होना हीं चाहिए। साथ हीं देशविरोधियों की संख्या चाहे कितनी हीं क्यों न हो सख्ती से निपटना समय की मांग है।प्रदेश मीडिया प्रभारी ने पिछले सात वर्षों में माननीय प्रधानमंत्री मोदी के राष्ट्रसेवा,ऐतिहासिक वैश्विक प्रयासों एवं सफलताओं की सराहना करते हुए कहा कि हमें गर्व है कि नरेंद्र दामोदर दास मोदी हमारे प्रधानमंत्री है।

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