किसानों को संक्रमण से बचाने को चिंतित वैज्ञानिक

फोटो शोधार्थी सिमरन कीर्ति

रिपोर्ट;सुभाष चंद्र कुमार;समस्तीपुर।
समस्तीपुर पूसा, कोरोना वायरस के संक्रमण से शहर एवं गावं दोनों ही अछूता नहीं रहा है। संक्रमण सम्पूर्ण देश में धीरे धीरे अपनी पकर बढाते हुए जा रही है। इसके बढ़ते हुए संक्रमण को देखते हुए किसान और कृषि से जुरे मजदूर वर्ग के सामने एक विकट समस्या है। जबकि कृषि की दृष्टिकोण से अभी रबी फसल की कटाई एवं संग्रहण का मूल समय है. साथ ही गन्ना की फसल की बुआई का महत्वपूर्ण समय है। किसानों की इस विकट परिस्थिति में नोवेल कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए गेहूं की कटाई और गन्ने की बुआई के लिए लोगों का मिलना एवं एकत्रित होना लाजमी है। इस तरह के विपरीत परिस्थिति में किसानों के हित को देखते हुए डा. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय स्थित जैव प्रोद्धोगिकी संकाय के प्रोफ़ेसर डा. विनय कुमार शर्मा की निगरानी में विद्धावाचस्पति डिग्री के शोध कार में कार्यरत छात्रा सिमरण कीर्ति ने बहुत हद तक तकनिकी जानकारियाँ व सावधानियां साझा कर देश को कोरोना मुक्त बनाने का निर्णय लिया है।

जिसमे मुख्यरूप से कटाई व बुआई के समय सभी व्यक्ति अपनी अपनी पीने की पानी का बोतल अलग अलग रखें और उसे एक दुसरे के साथ साझा करने से परहेज करें। यदि कार्य करने के दौरान संभव हो सके तो अपने मुहं पर मास्क तथा हाथों में ग्लोव पहनकर कार्य संपादित करने का प्रयास करें. कार्य के दौरान खेतों में पर्याप्त मात्रा में पानी एवं सैनीटाईजर का उपयोग जरुरत के हिसाब से करें. कृषि यंत्रों के उपयोग से पूर्व एवं उसके बाद साबुन व सैनीटाईजर का उपयोग से संक्रमित होने या करने से बचा जा सकता है। फसल की कटाई के पहले दिन उपयोग में लाये गए कपरों को अच्छी तरह से धो लेना बेहतर होगा. खेतों में फसल काटने अथवा खाना खाने के समय सोसल डिस्टेंसिंग यानी कम से कम 1.5 मीटर की दुरी बनाकर ही कार्य करें। कार्य करने के समय खाना के वर्तन बिल्कुल ही अलग अलग रखें तथा खाने के उपरान्त वर्तन व हाथों को अच्छी तरीके से साबुन से सफाई कर लें। फसलों की कटाई, बुआई, एवं ढूलाइ के समय बार बार नाक, मुहं तथा आँख छूने से परहेज करें। यदि किसी भी व्यक्ति को कृषि कार्य के दौरान सर्दी, जुकाम, सरदर्द तथा बुखार के लक्षण प्रतीत होता हो तो इस परिस्थिति में उस व्यक्ति को कार्य से अविलम्ब मुक्त करते हुए जांच के लिए भेज दें। वहीँ वैज्ञानिक डा. शर्मा ने कहा कि स्वस्थ शरीर से ही स्वस्थ व सुन्दर देश का निर्माण संभव है।

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