कृषि विभाग ने टिड्डी दल भगाओ अभियान का किया शुरूआत

रिपोर्ट, मो. अंजुम आलम, जमुई (बिहार)
जमुई: किसानों को टिड्डी दल से सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने कृषि विभाग अंतर्गत आत्मा द्वारा बरहट प्रखंड के केड़िया ग्राम में टिड्डी दल भगाओ अभियान की शुरुआत की है। आत्मा जमुई के द्वारा निर्मित महिला समूह में जैविक विधि से निमास्त्र और अग्निआस्त्र तैयार किया गया है। इस निमास्त्र के प्रयोग से अपने फसल को टिड्डी के प्रकोप से बचाया जा सकता है। सभी समूह की महिलाओं ने इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और निर्णय लिया कि हमलोग अपने फसल को टिड्डी के प्रकोप से बचाएगे। इस मौके पर आत्मा जमुई के उप परियोजना निदेशक मुकुल कुमार, बरहट प्रखंड के सहायक तकनीकी प्रबंधक ,अरविंद कुमार, शानु कुमारी, केड़िया ग्राम के संतोष कुमार, सुमन कुमार,राजकुमार यादव इत्यादि लोग मौजूद थे।

बता दें कि जमुई के जैविक किसानों ने प्रशासन को पूर्व में दिए आवेदन में कहा है कि एक वर्ग किलोमीटर में फैला एक टिड्डी दल हर रोज़ 35000 इंसानों के बराबर का भोजन खा सकता है। इसलिए इस संकट को लेकर किसान चिंतित हैं। किसानों ने बताया की पिछले कई महीनों में किसानों पर एक के बाद एक संकट आ रहे हैं। पहले कोरोना के कारण हुई देशबन्दी ने हमारी आमदनी पर बुरा असर डाला। जलवायु परिवर्तन की वजह से होने वाली बे मौसम बरसात और तेज़ आँधी-पानी, वज्रपात, ओलाबारी से लगातार खेती, खाद्य सुरक्षा और आमदनी संकट में है। अगर टिड्डी दल का हमला हुआ तो किसान बेमौत मारे जाएंगे। पिछले दो महीनों से मौसमी उथल- पुथल मची हुई है। इस दौरान कम से कम 6 से 8 बार तेज़ आँधी-पानी, ओलावृष्टि और अत्यधिक तापमान की घटनाएँ देखने को मिली हैं। बताया जाता है कि रेगिस्तानी टिड्डियों की रोकथाम के लिए आमतौर पर मालथियौन या ऑर्गेनोफॉस्फेट कीटनाशक का प्रयोग किया जाता है। कीटनाशक विशेषज्ञ बताते हैं कि इस कीटनाशक का प्रभाव मानव शरीर पर काफ़ी लंबे समय तक बना रहता है और यह कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। रासायनिक कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से शायद टिड्डियों की रोकथाम नहीं हो पाएगी पर व्यापक स्तर पर अन्य जीवजंतुओं, मवेशियों और मनुष्यों को इनका दंश झेलना पड़ सकता है। पर राहत की बात यह है कि कई विशेषज्ञों के अनुसार टिड्डियों के दल उन खेतों पर नहीं बैठ रहे जिनपर नीम के तेल या नीम की पत्तियों के रस का छिड़काव किया गया था। इसके अलावा, लहसुन और मिर्च से बनी जैविक दवाइयों के छिड़काव से भी कुछ जगहों पर फ़ायदा हुआ है।

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