कोरोना ने नौनिहालों का भविष्य किया चौपट

फोटो – स्कूल में लटका ताला।

रिपोर्ट;ब्यूरो राम विलास,नालंदा।
राजगीर;-कोरोना काल में शायद ही कोई ऐसा घर परिवार है, जो इसके दुष्प्रभावों से अछूते हैं।सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, छात्र – छात्रों, उनके पालकों की है।बच्चों का भविष्य लगभग चौपट हो गया है।कोरोना के चलते डेढ़ साल से स्कूलों में ताले लगे हैं।शिक्षण संस्थानों के कपाट बंद होने के कारण बच्चों की पढ़ाई ठप है।एक तरफ बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है तो दूसरी तरफ बच्चों के भविष्य गढ़ने वाले शिक्षकों पर भी कोरोना काल का काफी बुरा असर पड़ रहा है।सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को तो आगे पीछे कर वेतन का भुगतान हो ही जाएगा।लेकिन प्राइवेट स्कूलों के संचालकों और शिक्षकों की हालत बदहाल हो गई है।

नामी-गिरामी शैक्षणिक संस्थानों के शिक्षकों को वेतन आधा कर दिया गया है। छोटे स्कूलों के शिक्षकों पर नो वर्क, नो पे का फार्मूला लागू है।शिक्षण संस्थानों के कपाट बंद होने से बच्चों को शिक्षित करने व शिक्षा से जोड़े रखना अभिभावकों के लिए चुनौती बन गया है।बच्चे और अभिभावक दोनों अपने उद्देश्य से भटक गये हैं।अधिकांश बच्चों का घर ही पाठशाला बन गया है।जहाँ बच्चे पढ़ते कम और खेलते अधिक हैं।बच्चों को शिक्षित करने के लिए भले ही स्कूलों द्वारा ऑनलाइन क्लास शुरू की गई है।लेकिन वह सिस्टम उतना कारगर नहीं हो पा रहा है, जितना ऑफलाइन क्लास होते थे।

ऑनलाइन क्लास में अनेक प्रॉब्लम हैं।कहीं नेटवर्क का प्रॉब्लम, तो कहीं संसाधन की कमी आड़े आ रही है।ग्रामीण क्षेत्र में कई ऐसे छात्र-छात्राएं और
अभिभावक हैं, जिनके पास कम्प्यूटर सिस्टम और लैपटॉप की बात तो दूर रही, एंड्रॉयड फोन तक नहीं है।इसके चलते ऑनलाइन क्लासेज नहीं कर पाते हैं। इधर डेढ़ साल से कोविड काल ने निजी स्कूलों को औंधे मुंह गिरने पर मजबूर कर दिया।इस दौरान स्कूलों में कोरोना महामारी को लेकर ताला लटका हुआ है।बीच में जब महामारी के पहले स्टेज पर थोड़ा नियंत्रण हुआ तो एक साल से बंद स्कूलों के संचालकों द्वारा महाजनों से कर्ज लेकर फिर से खोला गया।लेकिन एक महीने भी स्कूल नहीं चल सका और कोरोना की दूसरी लहर शुरू हो गयी।

इस कारण स्कूलों में फिर ताला लगाना पड़ गया।लगातार बंद रहने के कारण स्कूल संचालकों को स्कूल भवन का किराया चुकाना चुनौती बन गया है।कई स्कूलों के वाहनों का टायर और बैट्री अधिक समय से गाड़ी के खड़े रहने के कारण खराब हो गया है।गाड़ी के इंजन में भी खराबी आ चुकी है।निदेशक एसके प्रभाकर, सुनील कुमार और विजय कुमार चौधरी ने कहा कि स्कूल संचालक को अपना पेट भर पाना कठिन हो रहा है। ऐसे में शिक्षकों को सहयोग कैसे किया जायेगा।सुनील कुमार और राजेश नन्दन ने बताया कि बच्चों का भविष्य तो कोरोना ने अंधकारमय कर दिया है।निजी स्कूल संचालकों को भुखमरी के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।

Comments are closed.