गंभीर बीमारी नियंत्रण के लिए योग जरूरी

रिपोर्ट;ब्यूरो राम विलास,नालंदा।
राजगीर;-नालंदा डायलॉग के दूसरे दिन योग और योग दर्शन विषय पर ऑनलाइन चर्चा की गई।इस चर्चा में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के स्कॉलरो ने हिस्सा लिया।वक्ताओं ने कहा योग जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।इससे गंभीर से गंभीर बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है।योग स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से उत्तम नहीं अति उत्तम है।

योग स्वास्थ्य लाभ के साथ आध्यात्मिक क्षेत्र में फैला है।इससे हेल्थ और लाइफस्टाइल में भारी बदलाव होता है।नव नालंदा महाविहार डीम्ड यूनिवर्सिटी नालंदा में आयोजित तीन दिवसीय नालंदा डायलॉग के दूसरे दिन ऑनलाइन आयोजित परिचर्चा में वक्ताओं ने यह कहा।परिचर्चा की अध्यक्षता मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान नई दिल्ली के निदेशक डॉ वी वासव रेड्डी ने किया।इस अवसर पर आयुष मंत्रालय के योग सर्टिफिकेशन बोर्ड के मुख्य अधिकारी ने योग पर चल रहे प्रभाव और उसके अनुसंधान पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने योग की 20 मिनट से लेकर आधे घंटे तक के पैकेज पर विस्तार से चर्चा की।ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस के शल्य चिकित्सक डॉ मृत्युंजय राठौर ने योग, चेतना तथा मस्तिष्क की क्रियाशीलता को लेकर विशेष चर्चा की।नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज की प्रो संगीता मेनन ने योग एवं चेतना विषय पर प्रकाश डाला।उन्होंने चेतना , युग-चेतना एवं संवेदना आदि की चर्चा की।राजगीर एसडीओ संजय कुमार द्वारा योग एवं योग की वैयक्तिक प्रभाव पर प्रकाश डाला गया।विपश्यना योग का दूसरा स्वरूप है इससे आत्म संयम और आत्म सुधार किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि योग नशा मुक्ति का कारक हो सकती है। योग की धरोहर से भारतीय संस्कृति को प्रतिस्थापित किया जा सकता है।वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ राजकुमार ने कहा कि अस्थमा के मरीजों के लिए योग औषधि की तरह है।इस रोग में योग के प्रभाव, योग-चर्या तथा योग थेरेपी से होने वाले लाभ पर प्रकाश डाला।डॉ शशि शेखर ने कहा कि युग से गंभीर से गंभीर बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है।

कैंसर हाई ब्लड प्रेशर मधुमेह एवं अन्य बीमारियों के नियंत्रण के लिए योग काफी लाभदायक है।महाविहार के कुलपति वैद्यनाथ लाभ ने योग और योग दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वर और व्यंजन की तरह योग और योग दर्शन है।उन्होंने कहा कि लाइब्रेरी ज्ञान का केंद्र है शिक्षकों और छात्रों को वहां जाने की आदत डालनी चाहिए।उन्होंने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए हर व्यक्ति को योग करनी चाहिए।योग और योगा, कृष्ण और कृष्णा के अंतर को बताते हुए कहा कि अंग्रेजी में कृष्ण को कृष्णा कहते हैं इसके शब्दार्थ अलग हो जाते हैं।

कृष्ण पुलिंग शब्द है, वही कृष्णा स्त्रीलिंग नालंदा डायलॉग में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के अलावे इजराइल के डॉ थ्योडोर, नेपाल में भारतीय दूतावास के विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र निदेशक डॉ केदारनाथ शर्मा द्वारा योग संबंधी गतिविधियों पर प्रकाश डाला गया।परिचर्चा में इस परिचर्चा में रायपुर एम्स सफदरजंग हॉस्पिटल बल्लभ भाई पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस सहित कई प्रतिष्ठित संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए।

इस अवसर पर प्रोफ़ेसर डॉ जुगल किशोर डॉ निहारिका लाभ प्रोफ़ेसर शशि शेखर प्रोफेसर सुशीम दुबे प्रोफ़ेसर विजय कर्ण, डॉ उमाशंकर व्यास डॉक्टर मिताली डॉ श्रीकांत सिंह डॉक्टर हरे कृष्ण तिवारी डॉक्टर बुद्धदेब भट्टाचार्य प्रोफ़ेसर रविंद्र नाथ श्रीवास्तव डॉ भिष्म कुमार डॉ चंद्र भूषण मिश्रा रूबी कुमारी अरुण कुमार यादव आरएन प्रसाद डॉ एसपी सिंहा डॉ बीके सिन्हा डॉक्टर दीपंकर लामा सहित अनेक स्कॉलर और स्टूडेंट उपस्थित थे।

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