गर्भवती का नहीं हो सका इलाज,तोड़ा दम

 


रिपोर्ट, मो. अंजुम आलम,जमुई (बिहार)
जमुई:- आए दिन सदर अस्पताल अपने कारनामे से हमेशा सुर्खियों में बना रहता है। एक के बाद एक लापरवाही के मामले सामने आते रहते हैं। जहां चिकित्सक की लापरवाही से मरीज दम तोड़ते नजर आते हैं। बुधवार की रात प्रसव के लिए आई एक गर्भवती की प्रसव पूर्व ही मौत हो गई। इधर मौत के बाद स्वजनों ने महिला चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। इस दौरान गर्भवती के शव के साथ स्वजन 3 घंटे तक सदर अस्पताल के प्रसव कक्ष में अड़े रहे और महिला चिकित्सक के अस्पताल आने की मांग करने लगे। मृतका गर्भवती शहर के भछियार मुहल्ला निवासी बिक्की ठठेरा की पत्नी अंशु कुमारी बताई जाती है।

मृतका के ससुर भोली ठठेरा ने बताया कि वे अपने बहु को प्रसव कराने के लिए सदर अस्पताल तकरीबन 8 बजे लाया था। इस दौरान महिला चिकित्सक नहीं थी जिसे बुलाने के लिए जीएनएम को कहा गया था। लेकिन चिकित्सक नहीं आई। सबकुछ ठीक-ठाक था उसके बाद उनकी बहू की तबियत अचानक बिगड़ गई जिसे इमरजेंसी के चिकित्सक द्वारा चेक करने के बाद बाहर ले जाने के लिए कहा गया था। जब वेलोग गर्भवती को लेकर निजी क्लिनिक गए तो वहां भर्ती नहीं लिया गया। नतीजतन फिर वापस सदर अस्पताल लाया गया। उन्होंने बताया कि स्ट्रेचर पर 3 घंटे तक गर्भवती पड़ी रही लेकिन चिकित्सक इलाज करना तो दूर देखने भी नहीं पहुंची। उसके बाद तकरीबन 1 बजे रात में उपाधीक्षक आए और महिला को मृत घोषित कर दिया।
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-इलाज में नहीं बरती गई है लापरवाही

ड्यूटी पर तैनात जीएनएम रंजू कुमारी और नीलू सिंह ने बताई कि गर्भवती में प्रसव पीड़ा के साथ किसी भी अन्य प्रकार का लक्षण नहीं पाया जा रहा था। उसवक्त प्रसव कराने की कोई हालात पैदा नहीं हो रही थी। इस वजह से गर्भवती को वार्ड में रखकर देखरेख की जा रही थी। तकरीबन 20 मिनट्स बाद अचानक गर्भवती की तबियत बिगड़ गई। जिसे फौरन प्रसव कक्ष लाया गया और ऑक्सीजन लगाया गया। उसके बाद इमरजेंसी ड्यूटी के चिकित्सक धीरेंद्र सिंह ने मृत घोषित कर दिया। सबकुछ ठीक-ठाक था लेकिन अचानक महिला की तबियत बिगड़ने और कुछ ही क्षण में मौत हो जाने का मामला हमलोगों के समझ से परे है। इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई है। महिला चिकित्सक को भी फोन किया गया था लेकिन उन्होंने अवकाश पर होने की बात कही थी।

-दोषी पाए जाने वाले कर्मियों पर की जाएगी कार्रवाई

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. सैयद नौशाद अहमद ने बताया कि सदर अस्पताल में चिकित्सकों के साथ-साथ अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की काफी कमी है। कई बार विभाग को चिट्ठी के माध्यम से कर्मियों की संख्यां बढ़ाने की मांग की गई है। कर्मियों के कमी की वजह से परेशानी हो रही है। सदर अस्पताल में सिर्फ तीन महिला चिकित्सक है। जिसमे डॉ. शालिनी लंबे दिनों से अवकाश पर है। और डॉ. स्वेता सिंह को भी चोट लगने की वजह से वह अवकाश पर चली गई है। जिस वजह से महिला चिकित्सक ड्यूटी पर नहीं थी।
गर्भवती के मौत की खबर मिलने के बाद प्रसव कक्ष पहुंचकर हंगामा को शांत कराया गया था। ड्यूटी पर मौजूद जीएनएम और स्वजनों से मामले की जानकारी ली गई थी। जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने के बाद जीएनएम पर कार्रवाई की जाएगी।

गर्भवती की अचानक मृत्यु होने की सूचना मिली थी। मामले की जांच के लिए उपाधीक्षक डॉ. सैयद नौशाद अहमद को कहा गया है।
डॉ. विजयेंद्र सत्यार्थी,सिविल सर्जन जमुई।

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