छुपे हुए ब्रह्म को जानना व मानना ही मूर्ति पूजा है: लक्ष्मी प्रपन्नाचार्य जीयर स्वामी जी

आशुतोष कुमार की रिपोर्ट
रोहतास: प्रभु श्रीराम का चरित्र मानव जीवन का मापदंड है। मनुष्य का एकमात्र उद्देश्य हरि कथा का श्रवण, भजन कीर्तन व मनन करना होना चाहिए। तीर्थ यात्रा कम हो तो कोई बात नही, लेकिन शव यात्रा ज्यादा करनी चाहिए। उक्त बातें नासरीगंज प्रखण्ड अंतर्गत मंगराव गांव में मां महामाया सह बजरंगबली एवं बूढ़ी मां के पावन पुनर्स्थापना के शुभ अवसर पर श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में श्रद्धालुओं को प्रवचन देते हुए श्रीलक्ष्मी प्रपन्नाचार्य जीयर स्वामी जी महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि दुनिया मे ऐसा कोई व्यक्ति नही जो मूर्ति पूजा से अछूता है। छिपे हुए ब्रह्म को जानना व मानना ही मूर्ति पूजा है। वेद व्यास कई वेद, पुराण व उपनिषद की रचना के बाद भी उदास रहते थे। तब नारद जी ने कहा कि अपने आहार, विचार, खानपान से सद्कर्म करें। तब सब कुछ ठीक हो जाएगा। शास्त्र कहता है कि सब संपति ईश्वर का है। भरत जी राम के पास संपति बंटवारे के लिए नही गये थे। अपितु विपत्ति बांटने गये थे। इसके पूर्व श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का भव्य आयोजन हेतु शुक्रवार को जलयात्रा निकाला गया। जलयात्रा में हाथी, घोड़ा, ऊंट, गाजे-बाजे व ध्वज के साथ मंगराव यज्ञ स्थल से महादेवां सोन नद घाट तक पूरे गांव समेत पूरे जिले से आये श्रद्धालु माथे पर कलश लिए जल यात्रा में शामिल हुए और पवित्र जल लेकर यज्ञ स्थल तक लौटे। घरवासडीह मठ के मठाधीश जगतगुरु श्री रामानुजाचार्ज स्वामी श्री नारायणाचार्ज जी महराज के तत्वधान मे एवं 1008 श्री बासुदेवा चार्य जी महराज के सानिध्य मे माँ महामाया एवं हनुमंत प्राण प्रतिष्ठा हेतु जलयात्रा निकाला किया गया। यज्ञ में शुक्रवार देर शाम श्रद्धालुओं को जगतगुरु लक्ष्मी प्रापन्नाचार्य जीयर स्वामी जी महाराज के प्रवचन भी सुनने को मिला। जिनके प्रवचन को सुनने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु यज्ञ स्थल पर एकत्रित हुए थे। उनके अलावा 1008 जगत गुरु वासुदेवाचर्य भास्कर जी, कौशलेश सदन अयोध्या, कीर्तनाचार्य रामायनि विनोद पाठक समेत प्रसिद्ध साधु-संतों का आगमन यज्ञ स्थल पर होगा तथा उनके प्रवचन से श्रद्धालु लाभन्वित होंगें। मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण श्रद्धालु यज्ञ स्थल पर उपस्थित थे।

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