जलवायु के अनुकूल कृषि शोध करना जरूरी;- कृषि सचिव 

प्रो. सुभाष चंद्र कुमार की रिपोर्ट
पूसा समस्तीपुर, डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय स्थित संचार केंद्र में आय एवं रोजगार सृजन में मशरूम उत्पादन की उपयोगिता पर वैज्ञानिकों के लिए 21 दिनीं विंटर स्कूल की शुरुआत किया गया। जिसकी अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने आगत अतिथियों के साथ दीप जलाकर उदघाटन किया। उदघाटन सत्र को सम्बोधित करते हुए बतौर मुख्य अतिथि सचिव कृषि विभाग बिहार सरकार डॉ एन श्रवण कुमार ने कहा कि कृषि के क्षेत्रों में जलवायु के अनुकूल शोध करना जरूरी है। गुणवत्तापूर्ण कृषि कार्य के लिए हमेशा मौसम बेरुखी अपनाए हुए रहती है। इस स्थिति में वैज्ञानिकों को किसानों के खेत मे जाकर वर्तमान सहित आने वाले समय मे वातावरणीय परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए आधुनिक तकनीकों को खेती में समाहित करने की आवश्यकता है। जिससे करीब करीब किसानों को होने वाले नुकसान को बचाते हुए आमदनी में बढ़ोत्तरी दिलाया जा सकता है। फिलवक्त मशरूम एवं मधुमक्खी पालन के प्रशिक्षण से बिहार ही नही वरण देश के कई प्रदेशों के किसान लाभ लेकर उन्नति की राह पर आए है। लाइवली हुड से ऊपर उठने की जरूरत है। देश के कई भूभागों में मॉल नियुट्रीशन चिंता का विषय के साथ साथ किसानों एवं वैज्ञानिको के लिए बहुत बड़ा चैलेंज बना हुआ है। इससे निबटने के लिए वैज्ञानिकों को किसानों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने पर बेहतर प्रतिफल मिलने की आसार प्रतीत हो रहा है। किसानों के खेत मे फसल अवशेष को जलाना भूमि के लिए अत्यचार साबित हो रहा है। उत्पाद के ब्रांडिंग के बाद ईमार्केटिंग पर भी कार्य करने की जरूरत है। इस प्रशिक्षण में देश के बिहार सहित मध्यप्रदेश एवं उड़ीसा के 19 वैज्ञानिक शामिल हो रहे है। इससे पूर्व मुख्य अतिथि ने परिसर में लगे स्टाल को गहन अवलोकन किया। जिसपर मशरूम सहित शहद आदि का प्रदर्शन किया गया था। संचालन डॉ दिनेश कुमार ने किया। सत्र के अंत मे धन्यवाद ज्ञापन आधार विज्ञान एवं मानविकी संकाय के डीन डॉ सोमनाथ राय चौधरी ने की। कृषि सचिव डॉ श्रवण ने भ्रमण के दौरान केंद्रीय कृषि विवि के कई रोचक अनुसंधान से रूबरू होकर बिसा फार्म में लगे बीज अनुसंधान कार्यों का भी जायजा लिया। इस दौरान बिसा प्रमुख डॉ राजकुमार जाट ने चल रहे शोध कार्यों से अवगत कराया। वहीं सचिव डॉ एन श्रवण कुमार ने विधापति सभागार में जिलें के कृषि समन्वयक एवं एटीएम व बीटीएम के साथ समीक्षा बैठक कर आवश्यक दिशा निर्देश दिया। मौक़े पर अधिष्ठाता, निदेशक एवं वैज्ञानिक मौजूद थे।

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