जिला प्रशासन की कार्य शैली से त्रस्त है आम आवाम


रिपोर्ट;गणेश कुमार।
सुपौल: –एक तरफ जहां बिहार की छवि देश दुनिया के पटल पर भ्र्ष्टाचार और अफसरशाही के गढ़ के रूप में बरकरार है वहीं उत्तर बिहार का छोटा सा जिला सुपौल भी अछूता नहीं रहा है जिससे कुप्रभावित हो रहे आवाम के पास अन्य कोई विकल्प नहीं बचा है। जिले के राघोपुर प्रखंड अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग 106 पर निर्माणाधीन ओवरब्रिज को लेकर राजमार्ग के बगल में भूमि की आवश्यकता हुई ततपश्चात खाली पड़े व आवासीय परिसर का मुआवजा देकर सरकार द्वारा भूमि अधिकृत कर लिया गया लेकिन स्थानीय दीपक मेहता का खाली पड़े लगभग अठारह गज निजी जमीन बिना किसी अधिसूचना एवं मुआवजा दिए जिला प्रशासन ने जबरन कब्जे में ले लिया और लगभग चालीस गज निजी जमीन (व्यावसायिक प्रतिष्ठान) को जिला प्रशासन द्वारा जबरन बिना किसी अधिसूचना व मुआवजा दिए कब्जे में लेने की नियत से बुलडोजर से प्रतिष्ठान को तोड़ने लगा ततपश्चात दीपक मेहता ने अनुमंडल पदाधिकारी,बीरपुर सुभाष कुमार से सम्पर्क किया।सुभाष कुमार ने तत्काल बुलडोजर को वापस भिजवा दिया एवं उचित मुआवजा मिलने के बाद ज़मीन खाली कर सरकार को सौंपने का निर्देश दिया।
मुख्य बाजार स्थित उक्त जमीन खाता संख्या 46,खेसरा संख्या 10 की वर्तमान कीमत लाखों रुपए की है। दीपक मेहता ने मामले को लेकर जनवरी 05,2020 को मुख्यमंत्री,बिहार सरकार और जनवरी 09,2020 को जिलाधिकारी सुपौल को आवेदन देकर उचित न्याय दिलाने का विनम्र निवेदन किया है लेकिन लगभग छः माह बीत जाने के बाद भी अब तक मामले की जांच तक नहीं हो पाया है।दीपक मेहता ने बताया कि उक्त मामले की जांच व कार्रवाई नहीं होने,जिला प्रशासन द्वारा जबरन ज़मीन हड़प लिए जाने की धमकी एवं व्याप्त अफसरशाही से मानसिक रूप से सहमा हुआ हूं।
क्षेत्र के रामविलास पासवान,इंद्रदेव मेहता,महेंद्र दास,रामदेव यादव,युवराज मंडल,कलर शर्मा,जुली मेहता,प्रकाश यादव, मो तसलीम,रामचंद्र शर्मा,रामनाथ चौधरी,छोटेलाल राम,संजय यादव, विनय भगत,सुबोध आदित्य, मोनू कर्ण,प्रशांत वर्मा,विश्वनाथ मंडल आदि ने कहा कि जिले में भ्रष्ट अधिकारियों की बड़ी तादाद से कुप्रभावित हो रहे आवाम के पास अब अन्य कोई विकल्प नहीं बचा है।

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