जीवन के प्रत्येक पल को परीक्षा मानते थे नेताजी

फोटो – मंचासीन अतिथि

रिपोर्ट;ब्यूरो राम विलास,नालंदा।
नालंदा;-नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125 वीं जयंती पराक्रम दिवस के रूप में नव नालंदा महाविहार सम विश्वविद्यालय, नालंदा में शनिवार को मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो रवींद्र नाथ श्रीवास्तव ने कहा कि सुभाष चंद्र बोस गहन चिंतन के अग्रदूत, पराक्रम और पुरुषार्थ के प्रतीक थे।सभी वर्ग में वे बराबरी चाहते थे। गरीबी दूर करने और जमींदारी उन्मूलन में उनके विचार आज भी मूल्यवान हैं।औद्योगिक समस्या से निपटने के लिए उन्होंने कृषि- सुधारों को पर्याप्त नहीं माना। वे देश में औद्योगिकीकरण की नई प्रक्रिया प्रारंभ करना चाहते थे।उपनिवेशों के मुक्तिसंग्राम को उन्होंने समाजवादी तंत्र की स्थापना का मार्ग बताया।

नेताजी भगवान महावीर के ” जियो और जीने दो” संदेश में विश्वास रखते थे।उन्होंने कहा था कि उनकी लड़ाई केवल भारत के लिए नहीं बल्कि मानवता के लिए है।इस अवसर पर प्रो. सुशीम दुबे ने कहा कि नेताजी देश के प्रति निष्ठावान और परम पराक्रमी थे।डॉ. श्रीकांत सिंह ने कहा कि उनके व्यक्तित्व के निर्माण में अनेक महापुरुषों का अवदान रहा है।उनमें बेनी माधव दास, स्वामी विवेकानंद, अरविंद घोष, टैगोर, चितरंजन दास प्रमुख हैं।इन सबमें एक अद्भुत समन्यवयन था।डॉ. शुक्ला मुखर्जी ने उदाहरण देते हुए कहा कि सुभाष चंद्र बोस जीवन के प्रत्येक पल को ‘परीक्षा’ मानते थे।

उन्होंने रवींद्र नाथ टैगोर के गीत का उदाहरण देते हुए कहा ‘जहां मन भयशून्य हो, सिर ऊंचा हो, ज्ञान मुक्त हो और दुनिया असंकीर्ण हो’ , हमें वहाँ जाना है।डॉ. विश्वजीत कुमार ने कहा कि देश के लिए ‘जय हिंद’ का नारा, गांधी जी के लिए ‘राष्ट्रपिता’ सम्बोधन नेता जी ने दिया था।महात्मा गांधी ने सुभाष चंद्र बोस को ‘नेता जी’ सम्बोधन दिया था।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. सुनील प्रसाद सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि नेताजी विविध आयामी थे।उनसे सीखने व उत्साहित होने की प्रेरणा मिलती है।कार्यक्रम का संचालन डॉ. हरे कृष्ण तिवारी ने किया. इस अवसर पर डॉ. दीपंकर लामा, डॉ. विनोद चौधरी, डॉ. रूबी कुमारी, डॉ. प्रदीप दास, डॉ. मुकेश वर्मा, डॉ. नरेंद्र दत्त तिवारी, डॉ. बुद्धदेव भट्टाचार्य, डॉ. धम्म ज्योति , डॉ. सुरेश कुमार, जितेन्द्र कुमार एवं अन्य शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मियों अलावे शोधार्थी व छात्र- छात्राएँ उपस्थित थे।

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