टिकट साथ साढ़े दस लाख लोगों ने देखा संग्रहालय

— 102 साल पुराना है नालंदा संग्रहालय
— 15 हजार पूरावशेष भंडार में पड़े हैं
— 15 साल तक के बच्चों का है निशुल्क प्रवेश

रिपोर्ट ;राम विलास ,राजगीर।

नालंदा;-एक सौ दो साल पुराना नालंदा का पुरातत्व संग्रहालय देश के ख्यातिलब्ध संग्रहालयो में एक है सौ साल बाद भी यह जस का तस है इसका विकास कुछ नहीं हो सका है इस संग्रहालय में प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के उत्खनन से प्राप्त पूरावशेषों को संजोया गया है इसके अलावा राजगीर के पुरास्थलों की खुदाई से प्राप्त और गांवों से प्राप्त पूरावशेष यहां संग्रहित हैं इस संग्रहालय में मात्र चार कमरों में प्रदर्श लगाए गए हैं मुख्य हॉल के अलावे चार दीर्घाओ में लगे शो केस में 350 पूरावस्तुओं को प्रदर्शित किया गया है करीब 15 हजार से अधिक पूरावशेष भंडार में सुरक्षित पड़ा है इस संग्रहालय के प्रदर्शो में पाषाण शिल्प प्रतिमाएं कांस्य शिल्प, गच शिल्प, मिट्टी की वस्तुएं (टेराकोटा) लौह उपकरण, हाथी दांत व अस्थि निर्मित वस्तुएं, प्राचीन मृदभांड, अभिलेख आदि अनेकों पूरावशेष हैं इन दुर्लभ पुरावशेषो को देखने के लिए देश-दुनिया के सैलानी बड़ी संख्या में नालंदा पहुंचते हैं यह संग्रहालय सैलानियों को आकर्षित करने में किसी से पीछे नहीं है नौ साल में 10 हजार से अधिक दुनिया के सैलानियों ने इसका दीदार किया है देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए समान टिकट दर यहां निर्धारित है 15 साल के बच्चों को संग्रहालय देखने के लिए नि:शुल्क प्रवेश है मुख्यमंत्री शैक्षणिक भ्रमण योजना के तहत बच्चे निशुल्क संग्रहालय का भ्रमण करते हैं इनकी संख्या टिकट लेकर संग्रहालय देखने वालों से कई गुना अधिक होता है वर्ष 2013- 14 में सैलानियों की संख्या में थोड़ी गिरावट आई थी लेकिन इसके बाद साल दर साल संग्रहालय देखने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है सैलानियों के लिए मुख्य हाल में प्रदर्शित पाषाण और शिल्प के मटके, 12 हाथों वाले बोधिसत्व अवलोकितेश्वर, सामंतभद्र की प्रतिमा सप्तफणो से युक्त नागराज, बुद्ध की विशाल प्रतिमा आदि आकर्षण का केंद्र है कक्ष के मध्य में प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष का प्रतिरूप (मॉडल) बरबस सैलानियों को आकर्षित करता है इसी प्रकार दीर्घा एक में हिंदू, जैन, बौद्ध धर्म के देवी देवताओं की पाषाण प्रतिमाएं प्रदर्शित की गई हैं इनमें खसपर्ण अवलोकितेश्वर, तांत्रिक देवता हेरूप, गणेश का दमन करती देवी अपराजिता, सात शूकरो के रथ पर देवी मारिची, शिव, पार्वती, कुबेर, विष्णु, लक्ष्मी, रेवत आदि हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व करती है ऋषभनाथ और पार्श्वनाथ की प्रतिमाएं जैन मूर्तियों उदाहरण हैं

फोटो संग्रहालय भवन
यह देश के पुराने पुरातत्व संग्रहालय में एक है इसे देखने वाले पर्यटकों की संख्या में हर साल इजाफा हो रहा है सैलानियों को आकर्षित करने के लिए प्रदर्श को बेहतरीन ढंग से सजाया व प्रदर्शित किया गया है इस संग्रहालय में अपेक्षित कमरा नहीं होने के कारण मात्र 350 प्रदर्श लगाए गए हैं जबकि 15 हजार से अधिक पूरावशेष भंडार में सुरक्षित हैं
शंकर शर्मा, सहायक अधीक्षण पुरातत्वविद्, पुरातत्व संग्रहालय, नालंदा

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