ट्रांसफार्मर सहित तालाब में कभी भी गिर सकता है बिजली खंभा, हो सकती है बड़ी अनहोनी

रिपोर्ट;ब्यूरो राम विलास।
नालंदा.;-बिजली विभाग की लापरवाही से सिलाव प्रखंड के चंडी मौ गांव में किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है. इस हादसे की आशंका से ग्रामीण डरे और सहमे हैं. ग्रामीणों के अनुसार चंडी मौ के पुष्कर्णी तालाब की उड़ाही जल जीवन हरियाली योजना से कराई गई है. बिजली विभाग द्वारा तालाब के एक तरफ बिजली का खंभा तालाब में ही गाड़ कर तार ताना गया है, तो दूसरी तरफ तालाब किनारे पोल गाड़ कर ट्रांसफार्मर लगाया गया है. ट्रांसफार्मर का एक पोल तालाब में है. वह पानी में डूबा हुआ है. मिट्टी कटाव के कारण किसी भी समय वह पोल गिर सकता है. पोल गिरने से 11000 और 440 वोल्ट के तार तालाब में गिरने से बहुत बड़ा अप्रिय घटना होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है. ग्रामीणों को डर है कि यदि करंट रहते ट्रांसफार्मर सहित पोल गिरने से पानी में करंट आना तय है. पानी में करंट आने के बाद उसके संपर्क में आने वाले मानव और मवेशी दोनों उससे प्रभावित होंगे. इससे इनकार नहीं की जा सकती है. लघु सिंचाई विभाग के अधिकारियों के द्वारा तालाब उड़ाही के दौरान ही बिजली विभाग से तालाब के भीतर आने वाले बिजली के खंभों को हटाने का अनुरोध किया गया था. लेकिन लघु सिंचाई विभाग के आग्रह को बिजली विभाग के अधिकारियों ने कोई नोटिस लेने के बजाय तालाब से पोल हटाने के एवज में मोटी राशि की मांग कर बैठा. राजकुमार सिंह स्मृति न्यास के अध्यक्ष नीरज कुमार ने बिजली विभाग के प्रबंध निदेशक को ज्ञापन भेजकर संभावित घटना की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है. उन्होंने कहा है कि लघु सिंचाई विभाग और ग्रामीणों के द्वारा बार-बार ध्यान आकृष्ट कराने के महीनों बाद भी बिजली विभाग द्वारा तालाब से बिजली के खंभों को हटाकर अलग गाड़ने और ट्रांसफार्मर लगाने की कार्रवाई अब तक नहीं की गई है, जिसके कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

विभागीय अधिकारी का कहना है की पुष्कर्णी तालाब से बिजली पोल हटाने के लिए लघु सिंचाई विभाग द्वारा आवेदन दिया गया है. बिजली विभाग द्वारा बिजली पोल हटाने में होने वाले खर्च की एस्टीमेट लघु सिंचाई विभाग को दी गई है. मांगी गई राशि मिलते ही बिजली पोल तालाब से हटा दिया जाएगा.
इंजीनियर इंद्रजीत कुमार, विद्युत कार्यपालक अभियंता, राजगीर।

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