ठोस कचरा प्रबंधन में नप फेल, ग्रीन ट्रिब्यूनल नियम का नहीं हो रहा पालन

रिपोर्ट,मो.अंजुम आलम,जमुई (बिहार)
जमुई:- शहर के वार्डों में घर से डोर टू डोर कचरा लेकर सुरक्षित तरीके से निस्तारण करने के लिए चलाई जा रही ठोस कचरा प्रबंधन योजना नगर परिषद के कुप्रबंधन का शिकार हो कर रह गई है। वर्तमान में योजना कागजों में ही सिमट गई है।अब तो मुहल्लेवासियों को सीटी की आवाज़ भी सुनाई नहीं दे रही है।घर-घर से सिटी बजाकर कचरा लेने के लिए पहुंचने वाले वाहन भी अब कभी-कभार ही दिखाई पड़ते हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि ठेके पर चलाई जा रही इस योजना के लिए 3 ट्रैक्टर व 10  डाला टेंपो लगाने का दावा किया जा रहा है, मगर सभी वाहन शहर में दिखाई नहीं देते। लोगों की मानें तो सफाई के साथ-साथ सफाई वाहन भी कागजों में ही चलाई जा रही है।
गौरतलब हो कि जमुई में नगर परिषद के ठोस कचरा प्रबंधन योजना पूरी तरह फेल होने पर जागरण ने शहर की सफाई व्यवस्था और कचरा प्रबंधन को लेकर जब पड़ताल की तो कई खामियां नजर आए। सफाई व्यवस्था की दवा करने वाले नप की पोल खुल गई।
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– साफ-सफाई के लिए नप को दिया गया था विशेष निर्देश

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने शहरों को साफ-सुथरा तथा प्रदूषण मुक्त रखने के लिए शहरी ठोस अपशिष्ट (प्रबंधन व हस्तालन) नियम जारी किया था। योजना के तहत घरों में कचरा एकत्रित करने के लिए डिब्बे बांटने के साथ ही वाहन की सहायता से कचरे को एकत्रित करने के लिए आदेश दिया था। आदेश में कचरे का सुरक्षित तरीके से निस्तारण करना भी शामिल था। मंत्रालय ने इसके बाद भी कई आदेशों के द्वारा सरकार व नगर परिषद को इसके लिए सचेत किया लेकिन इन नियमों के पालन में नप पूरी तरफ फेल हो गई है।
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-नप कर रही झूठा दावा

नगर परिषद का यह भी दावा है कि प्रतिमाह करीब 35 से 40 टन कचरा शहर से उठाया जा रहा है, जबकि हक़ीक़त कुछ और ही बयां कर रही है। शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर लगा रहता है। यहां तक की लोगों ने अपनी मर्जी के मुताबिक जगह-जगह कचरा स्टैंड बना लिया है जिसे न कोई समझाने वाला है और न ही रोकने वाला।
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-आधा-अधूरा सफाई कर ठीकेदार कर लेते हैं खानापूर्ति

ठीकेदार द्वारा भी इस कार्य में लापरवाही बरती जाती है और सिर्फ खानापूर्ति कर मोटी राशि की उगाही कर लेते हैं। स्वच्छता के नाम पर जमुई के 30 वार्ड की हालत ऐसी बनी हुई है की प्रत्येक दिन सड़क व गली में कूड़े का अंबार देखने को मिल रहा है। लोग कूड़े-कचड़े में घुस कर आने-जाने के लिए मजबूर रहते हैं फिर भी नगर परिषद द्वारा साफ-सफाई पर ध्यान नहीं दिया जाता है। शहर के तीसों वार्ड की हालत ऐसी है कि कहीं कूड़े सड़ रहे हैं तो कहीं कूड़े की सफाई 10 से 15 दिनों के बाद किया जाता है।
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जल-जमाव व गंदगियों से कई बीमारियों का होता है जन्म

सफाई के आभाव की वजह से सड़क,गली,गड्ढे और नाले में जमे कूड़े-कचड़े के सड़ने-गलने से कई गंभीर बीमारियां जन्म लेती हैं। सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. सैयद नौशाद अहमद ने बताया कि ज़्यादा दिन तक कूड़े-कचड़े जमा रहने की वजह से मच्छड़ और मक्खियों व कीड़े-मकोड़े का भी तेजी से जन्म होता है। जिससे लोग मलेरिया,टायफाइड,
डायरिया,महामारी सहित अन्य कई घातक बेमारियों के घेरे में आ जाते हैं।

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