डीटीसी बसों के ड्राइवर बेलगाम, नहीं रखते यात्रियों का ध्यान

आर.के.तिवारी 
नई दिल्ली। दिल्ली की लाइफ लाइन मानी जाने वाली दिल्ली परिवहन निगम यानी डीटीसी की बसों की व्यवस्था को दिल्ली सरकार ठीक नहीं कर पा रही है। कहीं महिलाओं के साथ छेड़छाड़ हो जाती है तो कहीं बस ड्राइवर बसों को स्टाप पर नहीं रोकते हैं। यही नहीं, इन बसों के ड्राइवर इतने बेलगाम होते हैं कि वे आए दिन दुर्घटना को भी अंजाम देते रहते हैं। डीटीसी बसों से संबंधित पिछले दिनों की कुछ खबरों पर नजर डालें तो यह बात सहज ही प्रमाणित हो जाएगी।

दिल्ली की डीटीसी बसों में महिलाओं को सुरक्षित रखने के लिए करीब दो साल पहले मार्शल की तैनाती की शुरुआत की गई थी। फिर भी ये प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। दिल्ली से सटे नोएडा में एक महिला पत्रकार ने दिल्ली जाने के लिए डीटीसी बस पकड़ी। महिला खचाखच भीड़ में खड़ी थी। अगले स्टॉप पर टिकट चेक करने वाले पांच डीटीसी कर्मचारी चढ़े।

महिला पत्रकार का आरोप है कि इन पांच कर्मचारियों में से एक टिकट चेकर ने टिकट मांगते समय उसे ग़लत तरीके से छुआ। इतना ही नहीं, जब महिला ने विरोध किया तो टिकट चेकर ने धमकी भरे अंदाज में कहा, मुझसे मत उलझ।

महिला पत्रकार ने ड्राइवर और कंडक्टर से बस का दरवाजा न खोलने की अपील की, जिससे कि उसे सीधे पुलिस थाने पहुंचाया जा सके। लेकिन ड्राइवर ने गाड़ी रोक दी और कंडक्टर ने उसे बाहर निकलने दिया।

इस दौरान महिला ने मार्शल से भी मदद मांगी लेकिन अत्यधिक भीड़ होने की वजह से जब तक मार्शल वहां पहुंचता आरोपी बाहर निकल चुके थे। महिला पत्रकार ने कंडक्टर से कहा कि वो पुलिस से इस बात की शिकायत करेंगी, इसके जवाब में कंडक्टर ने कहा कि वो यहीं उतर जाएं और फिर जिससे कहना है कहें।

महिला पत्रकार ने बहादुरी दिखाते हुए बस से उतरने से मना कर दिया। उसने ड्राइवर से कहा कि वो बस को नजदीकी पुलिस थाने ले चले। उसके बाद बस 12/22 थाने पहुंची। लेकिन वहां शिकायत दर्ज करने के लिए कोई अधिकारी मौजूद नहीं था। महिला पत्रकार ने नोएडा के एसएसपी को ट्वीट करके मामले की जानकारी दी।

यूपी पुलिस हरकत में आयी। हालांकि जब इस मामले को लेकर बस में मौजूद मार्शल से बात की गई तो उसने बताया कि पैसेंजर के साथ दुर्व्यवहार न हो, ये सुनिश्चित करना उसका काम है। उसने कहा, मेरा आज रूट नंबर 33 था। सेक्टर 43 से भजनपुरा तक।

मैं बस में था। पीछे का दरवाजा खुला तो वो लोग पीछे के दरवाज़े से निकल गए। पीछे एक बटन लगा होता है जिससे कोई भी दरवाजा खोल सकता है। डीटीसी के कर्मचारी ने बदतमीजी की है। मेरे रूट रोज बदलते हैं। मेरे पास डंडा नहीं है। हमें इजाज़त नहीं है डंडे रखने की।

पुलिस ने नोएडा सेक्टर- 24 थाने में पांच टिकट चेकर, मार्शल, ड्राइवर और कंडक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने मामले में तेजी दिखाते हुए पूछताछ के लिए मार्शल सहित चार आरोपियों को हिरासत में ले लिया। हालांकि मुख्य आरोपी पुलिस के शिकंजे में नहीं आ पाया।

राजधानी दिल्ली के नारायणा इलाके में एक स्कूल बस और डीटीसी की क्लस्टर बस में टक्कर से 6 बच्चे घायल हो गए। घायल बच्चों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया। बताया गया कि यह बस राजेंद्र नगर के सलवान पब्लिक स्कूल की थी।

दिल्ली की कभी लाइफ लाइन मानी जाने वाली दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के बेड़े में तमाम प्रयास के बाद नौ साल में एक भी नई बस को शामिल नहीं किया गया। पहले डीटीसी के बेड़े में तकरीबन 6200 बसें थी जो कि घटकर अब मात्र 3781 रह गई हैं। मियाद पूरी होने के बाद बसों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। यही हाल रहा तो 2024 में डीटीसी के बेड़े में गिनी चुनी बसें ही रह जाएंगी।

दिल्ली में कुछ साल पहले लो फ्लोर बस (एसी और नान एसी) और कुछ स्टैंडर्ड फ्लोर की बसें चला करती थीं। पर अब स्टैंडर्ड फ्लोर की बसों का संचालन पूरी तरह से बंद हो गया है। ये बसें दिल्ली की सड़कों पर पहली बार साल 2000 में उतरी थीं। वहीं, लो फ्लोर एसी और नान एसी बसों की पहली खेप साल 2007-2008 में आई थी।

उस समय यह निर्धारित किया गया था कि ये बसें या तो साढ़े सात लाख किलोमीटर या फिर 12-13 साल तक चलाई जा सकती हैं। अब वे बसें ही चल रही हैं जो डीटीसी के बेड़े में राष्ट्रमंडल खेलों के समय शामिल हुई थीं।

नजफगढ़ रोड पर एक बार फिर से वाहनों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया है। चौक-चौराहों पर आटो, ई-रिक्शा के साथ काफी संख्या में मिनी ट्रक और कारें खड़ी होने लगी हैं। उत्तम नगर बस टर्मिनल में बसों को खड़ा करने के लिए जगह न मिलने की स्थिति में सड़क पर ही दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की बसों को खड़ा कर दिया जा रहा है।

डिपो के गेट से बसों को खड़ा करने की जगह नहीं मिलती है तब यहीं से बसों को मोड़ना पड़ रहा है। डीटीसी के चालक टर्मिनल के गेट से लेकर चौराहे के बीच ही बसों को मोड़ने लग रहे हैं। मुख्य सड़क से आने जानेवाले वाहनों का ख्याल ही नहीं करते। इस तरह की स्थिति से आने-जाने वाले वाहन सवारों को परेशान होना पड़ रहा है। उत्तम नगर से जनकपुरी और विकासपुरी जाने वाले वाहन सवारों को आए दिन इस तरह की परेशानी का हर रोज सामना करना पड़ रहा है।

रोहतक रोड पर हुए एक दर्दनाक हादसे में ई रिक्शा चालक की मौत हो गई। हादसा तब हुआ जब रोहतक रोड पर पश्चिम विहार ईस्ट इलाके में लाल बत्ती पर ई रिक्शा एक हरे रंग की डीटीसी बस के पीछे खड़ा था। सभी बत्ती के हरे होने का इंतजार कर रहे थे।

तभी एक तेज रफ्तार से नीले रंग की डीटीसी बस आई और पीछे से ई रिक्शा में टक्कर मार दी। टक्कर लगने से ई रिक्शा के आगे का हिस्सा हरे रंग की डीटीसी बस के अंदर जा घुसा। ई रिक्शा चालक भी चपेट में आते हुए हरे रंग की बस में जा घुसे। मौके पर ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

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