डेढ हजार साल पुरानी इतिहास को पुनः जीवंत करेगा नालंदा विश्वविद्यालय के समकालीन तालाबों की उड़ाही

रिपोर्ट;ब्यूरो राम विलास,राजगीर।
राजगीर;-पायलट प्रोजेक्ट बनाकर प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के आसपास की समकालीन तालाबों की खोज और उसकी खुदाई – उड़ाही जल जीवन हरियाली योजना से कराने की मांग मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से ‘प्रकृति’ द्वारा की गई है। प्रकृति द्वारा नालंदा विश्वविद्यालय के समकालीन 52 तालाबों में से 28 तालाबों की खोज की गई है।
प्रकृति द्वारा सीएम को भेजे गए ज्ञापन में उन तालाबों की सूची उपलब्ध कराई गई है. ज्ञापन में प्रकृति के सचिव राम विलास द्वारा कहा गया है कि नालंदा विश्वविद्यालय के समकालीन सभी तालाबों की खोज कर उसकी खुदाई और उड़ाही कराने से नालंदा को एक नया आयाम मिलेगा. हजारों साल से जमीनदोज इतिहास दुनिया के सामने आयेगा. उन तालाबों के अस्तित्व में आने के बाद विश्व धरोहर के आसपास के इलाके का प्राकृतिक स्वरूप निखरेगा. उससे सरकार और किसान दोनों लाभान्वित हो सकेंगे. उन तालाबों के पुनर्जीवित होने से डेढ़ हजार साल पुरानी इतिहास को दोहराया जा सकेगा. सैलानी नालंदा विश्वविद्यालय के समकालीन तालाबों से साक्षात्कार कर सकेंगे. उससे किसान एक तरफ खेतों की सिंचाई करेंगे, तो दूसरी तरफ वह तालाब देशी-विदेशी पक्षियों का अभ्यारण भी बन सकता है. वह तैराकी प्रशिक्षण के लिए उपयुक्त होने के अलावे मछली पालन का बड़ा केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है. इको टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित कर एवं नौका विहार की व्यवस्था कर पर्यटकों के लिए झील आकार के तालाबों को आकर्षण का केंद्र बनाया जा सकता है. विश्वविद्यालय के आचार्य और छात्र उन तालाबों का दैनिक उपयोग करते थे. वही किसान सिंचाई के साधन के रूप में भी इस्तेमाल करते थे. वह तालाब वर्षा ऋतु के जल संरक्षण का मुख्य केंद्र होता था. इसके अलावा वह गांवों का भूगर्भीय जल स्तर को नियंत्रित करता था. वह भूमिगत जल को रिचार्ज भी करता था. वर्तमान में करीब आधे दर्जन को छोड़कर शेष तालाबों के वजूद लगभग समाप्त हो गए हैं. कुछ तालाब गाद से भर गए हैं, तो कुछ जमीनदोज और अतिक्रमण के शिकार हो गए हैं।


फोटो – नालंदा का विश्व धरोहर या नालंदा विश्वविद्यालय का समकालीन तालाब
—  प्राचीन तालाबों के नाम एवं गांव

इंद्र पुष्कर्णी (मुजफ्फरपुर), करगदिया (मुजफ्फरपुर), दूधौरा (मुजफ्फरपुर),  पद्म पुष्कर्णी (सूरजपुर), चानन (सूरजपुर), लोकनाथ   (सूरजपुर), गोधया (सूरजपुर), धौखरी (सूरजपुर),  पथलौटी (सारिलचक), तार सिंग  (सारिलचक), चनेनक (जुआफर), बनैल (बड़गांव),  सुरहा ( बड़गांव ), चमरगड्डी (बड़गांव), चौधासन ( बड़गांव), बैधनथा (बड़गांव), डगरा  (मोहनपुर), सूद  (मोहनपुर),  सूर्य तालाब (बड़गांव),  लोहंग (बड़गांव), गद्दा (बड़गांव),  देहर (बड़गांव), पक्की तालाब (जुआफर  बाजार) सभी सिलाव प्रखंड. इसी प्रकार भुनैय (मुस्तफापुर), निगेसरा (मुस्तफापुर), दीमा (मुस्तफापुर), सेगरखा (बेगमपुर), दीर्घ पुष्कर्णी (बेगमपुर) (सभी नूरसराय प्रखंड )

— इन पुस्तकों में है तालाबों की चर्चा

नालंदा विश्वविद्यालय के आसपास के समकालीन तालाबों की चर्चा कनिंघम की पुस्तक आरकेलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, ज्योग्रफी आफ इंडिया, एस बीयल की पुस्तक बुद्धिस्ट रिकॉर्ड वेस्टर्न वर्ल्ड, डॉ. डी. वाई. पाटिल की पुस्तक एंटीक्वैरियन रीमेंस आफ बिहार में मिलती है।

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