तालाब खुदाई में मिली भोले शंकर की प्राचीन प्रतिमा

फोटो – भगवान भोले शंकर

रिपोर्ट;ब्यूरो राम विलास,राजगीर।
राजगीर;-नालंदा थाना क्षेत्र के मुस्तफापुर गांव के निगेसरा तालाब की खुदाई एवं उड़ाही के दौरान कई पुरानी प्रतिमाएं मिली हैं. एक साथ कई मूर्तियों के मिलने से ग्रामीणों में कौतूहल बनी है. मूर्ति को देख लोगों के चेहरे पर उत्सुकता के भाव दिख रहे हैं. तालाब खुदाई से मिली इस प्रतिमा को देखकर मुस्तफापुर के ग्रामीणों में काफी हर्ष एवं खुशी देखी जा रही है. दूसरे गांव के लोग भी मुस्तफापुर पहुंचकर भोलेनाथ की एक झलक देखने को आतुर हैं. इस तालाब की खुदाई और उड़ाही लघु सिंचाई विभाग द्वारा जल जीवन हरियाली योजना से कराई गई है. ग्रामीणों के अनुसार वह तालाब प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के समकालीन है. विश्वविद्यालय के आचार्य और छात्र इसका दैनिक उपयोग करते थे. प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष से मुस्तफापुर की दूरी एक से डेढ़ किलोमीटर बताई जाती है. खुदाई-उड़ाही के दौरान मिली कुछ प्रतिमाओं को तालाब खुदाई करने वाले कर्मी तो कुछ नालंदा थाना पुलिस ले गई है. उनमें से कुछ खंडित प्रतिमा को गांव के ही मंदिर में रखा गया है. भोलेनाथ की एक आकर्षक श्याम पाषाण प्रतिमा की ग्रामीणों द्वारा पूजा अर्चना की जा रही है. गांव के निगेसरा और दीमा तालाब के बीच चातर पर भोले शंकर को ग्रामीणों द्वारा स्थापित किया गया है. ग्रामीणों के द्वारा वहां शिव मंदिर बनाने की योजना बनाई जा रही है. ग्रामीण विजय प्रसाद सिंह बताते हैं कि तालाब से मिली प्रतिमा बहुत पुरानी और बेशकीमती है. नालंदा विश्वविद्यालय के समकालीन मुस्तफापुर में तीन तालाब है. इनमें सबसे बड़ा भुनैय उसके बाद निगेसरा और दीमा तालाब है. सभी तालाबों की खुदाई के दौरान कई प्राचीन प्रतिमाएं मिली है. दीमा तालाब से भी कई प्रतिमाएं प्राप्त हुई हैं, जिनमें भगवान बुद्ध की एक आकर्षक प्रतिमा शामिल है. उस प्रतिमा को गांव में ही एक छोटा मंदिर बना कर सुरक्षित रखा गया है. ग्रामीण विजय प्रसाद सिंह, प्रोफेसर अरुण कुमार, प्रकृति के अध्यक्ष नवेन्दू झा, सचिव राम विलास, नालंदा मेमोरियल फाउंडेशन के अध्यक्ष नीरज कुमार, सुबोध कुमार सिंह, अरविंद कुमार, बौद्ध भिक्षु प्रज्ञापाल एवं अन्य लोगों ने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के समकालीन तालाबों को हेरीटेज घोषित करने की मांग सरकार से की है. उनका कहना है कि नालंदा विश्वविद्यालय हेरीटेज साइट हो सकता है, तो उसके समकालीन तालाब को भी हेरीटेज घोषित किया जाना चाहिए.

Comments are closed.