दीमा तालाब के बीच से सड़क बनाने पर हाईकोर्ट की रोक


फोटो – नालंदा विश्वविद्यालय के समकालीन दीमा तालाब

रिपोर्ट;ब्यूरो राम विलास,राजगीर।
राजगीर;-पटना हाईकोर्ट द्वारा प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की समकालीन दीमा तालाब के बीच से सड़क बनाने पर रोक लगा दी गयी है. यह कार्रवाई सिविल रिट जूरिडिक्शन केस नंबर 21350 की सुनवाई के दौरान की गई है। पेटीशनर सुबोध कुमार सिंह वर्सेज बिहार सरकार के मुकदमे की सुनवाई करते हुए न्यायधीश शिवाजी पांडेय और न्यायधीश पार्थ सर्थे की खंडपीठ द्वारा यह रोक लगाई गई है। मुस्तफापुर के विजय प्रसाद सिंह, संजीव कुमार, भरत प्रसाद सिंह, नवल सिंह, उषा देवी, संजय कुमार, निभा कुमारी और सुबोध कुमार सिंह एवं अन्य ने बताया कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के समकालीन नालंदा के आसपास के गांवों में करीब 52 तालाब हैं। उन्हीं तालाबों में मुस्तफापुर का 11 एकड़ का भुनैय तालाब, साढ़े छह एकड़ का निगेसरा तालाब और चार एकड़ का दीमा तालाब भी है।निगेसरा और दीमा तालाब से भगवान बुद्ध एवं अन्य देवी देवताओं की प्रतिमा बड़ी संख्या में मिली है। कुछ प्रतिमा को गांव में ही मंदिर बना कर पूजा अर्चना की जा रही है।जबकि कुछ को पुलिस थाने ले गई है। उन्होंने बताया कि नालंदा विश्वविद्यालय के समकालीन तालाबों को पुनर्जीवित करने और सुरक्षा प्रदान करने की जगह सरकार द्वारा तालाब के बीच से ही सड़क बनाई जा रही है।यह सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विपरीत है। विजय प्रसाद सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि किसी भी जल स्रोत तालाब, पइन, पोखर, आहार, नदी आदि भरकर किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं किया जा सकता है।

बावजूद पथ निर्माण विभाग द्वारा नूरसराय से बड़गांव होते सिलाव जाने वाली सड़क का निर्माण दीमा तालाब के बीच से करने पर आमदा है।उन्होंने कहा की एक तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जल जीवन हरियाली योजना के तहत तालाबों की खुदाई और उड़ाही करा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ पदाधिकारी तालाब और पइन को भरकर सड़क बनाने पर आमदा है।उन्होंने कहा कि इन तालाबों से किसान अपने खेतों की सिंचाई करते हैं। मत्स्य विभाग द्वारा उन तालाबों की मछली पालन के लिए बंदोबस्त भी किया जाता है। ‘प्रकृति’ समेत मुस्तफापुर, बेगमपुर, दामनखंधा, बड़गांव, सूरजपुर, सारिलचक, मुजफ्फरपुर, निर्मल विगहा, जुआफर, गजराज विगहा आदि गांव के ग्रामीणों ने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के समकालीन तालाबों की खुदाई एवं उड़ाही कराकर संरक्षित करने की मांग जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से की है।

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