धार्मिक और आध्यात्मिक मलमास मेला पर वैश्विक महामारी कोरोना ने लगाया ब्रेक


रिपोर्ट : ब्यूरो, राम विलास, नालंदा, बिहार।
नालंदा;-मगध साम्राज्य की ऐतिहासिक राजधानी और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन केंद्र राजगीर में लगने वाले मलमास मेला के आयोजन पर सरकार ने रोक लगा दी है। इस आशय का आदेश राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के विशेष सचिव डॉक्टर श्यामल किशोर पाठक द्वारा जारी किया गया है। 18 सितंबर 2020 से शुरू होकर 16 अक्टूबर 2020 तक इस वर्ष मलमास मेला का आयोजन किया जाना है। सरकारी निदेशानुसार डीएम योगेन्द्र सिंह ने मलमास मेला के दौरान होने वाले सभी कार्यक्रमों को रद्द करने का आदेश दिया गया है ।

— कुंडों और नदियों में नहीं होंगे सामूहिक स्नान

वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के प्रसार को देखते हुए बिहार सरकार ने यह बड़ा निर्णय लिया है। इसके पहले वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण राजकीय छठ मेला, बड़गांव पितृपक्ष मेला, गया और श्रावणी मेला, देवघर का आयोजन भी नहीं हो सका है। 18 सितंबर से शुरू होने वाला मलमास मेला स्थगित होने से सनातन धर्मावलंबियों को निराशा हाथ लगी है। उम्मीद की जा रही थी कि कुछ पाबंदियों और हिदायतों के साथ राजकीय मलमास मेला का आयोजन किया जायेगा। लेकिन ऐसा नहीं होने से उम्मीदों पर पानी फिर गया है। सरकारी आदेश जारी होने के बाद सब कुछ साफ हो गया है। नालंदा डीएम द्वारा मलमास मेला के दौरान होने वाले सभी कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया गया है। लेकिन मलमास मेला (पुरुषोत्तम मास) के पहले दिन वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ ध्वजारोहण करने की अनुमति प्रदान की गई है।

आदि अनादि काल से राजगीर में लग रहे मलमास मेला के दौरान मंदिरों में सदियों से चली आ रही पूजा पाठ करने की परंपरा में छूट दी गई है। मेला में झुंड बनाकर आने और झुंड के झुंड कुंड स्नान करने पर प्रशासन द्वारा पाबंदी लगाई गई है। हालांकि सरकार ने सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार पूजा पाठ करने की छूट दी गई है। केंद्र सरकार की और से जारी गाइड लाइन के अनुसार ही पूजा-पाठ की अनुमति प्रदान की जायेगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार 100 से अधिक लोग पूजा पाठ में शामिल नहीं हो सकते हैं।

— मेला के दौरान पधारते हैं 33 कोटि देवी देवता

सर्वविदित है कि भारत में केवल राजगीर तीर्थ में ही तीन साल पर राजकीय मलमास मेला का आयोजन किया जाता रहा है। एक महीना तक चलने वाले इस धार्मिक मेला में 33 कोटि देवी – देवता पधारते और एक महीने तक प्रवास करते हैं। दुनिया में केवल राजगीर मलमास मेला ही ऐसा धार्मिक मेला है, जहां 33 कोटि देवी – देवता पधारते और एक महीने तक कल्पवास करते हैं।

आदि अनादि काल से लगने वाला मलमास मेला का आयोजन सरकारी स्तर पर लक धक से की जाती रही है। पहली बार वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण पौराणिक एवं धार्मिक मलमास मेला का इस बार आयोजन नहीं हो रहा है। पौराणिक काल से लगते आ रहे इस मेले में देश-दुनिया के तीर्थयात्री और श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं। मलमास मेला के दौरान यहां के गर्म जल के कुंडों में स्नान करने का वही महत्व है, जो काशी, प्रयाग, हरिद्वार और उज्जैन आदि तीर्थों में स्नान करने का है। राजगीर में आयोजित मलमास मेला को अधिकमास और ‘पुरुषोत्तम मास’ के नाम से भी जाना जाता है।

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