नालंदा के उद्धार के लिए दलाई लामा से गुहार

रिपोर्ट;ब्यूरो राम विलास,नालंदा।
राजगीर;-तिब्बत के धर्मगुरु दलाई लामा को दुनिया के सबसे समृद्ध बौद्ध विद्या केन्द्र नालंदा को फिर से चमकाने के लिए राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर स्मृति न्यास द्वारा पत्र भेजकर अनुरोध किया गया है।न्यास अध्यक्ष नीरज कुमार द्वारा आध्यात्मिक संत को संबोधित पत्र में कहा गया है कि नालंदा का अतीत गौरवशाली रहा है।भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय का नाम और पहचान पहले से ही जग जाहिर है। 2016 में यूनेस्को द्वारा प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष को विश्व धरोहर का दर्जा दिया गया है।विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद इसकी प्रतिष्ठा दुनिया में फिर से बढ़ी है।बावजूद यह सरकारी उपेक्षा का शिकार है।

श्री नालंदा महाविहार के केवल 10 फीसदी भूभाग का उत्खनन अबतक हो सका है।यहां केवल 14 हेक्टेयर में यह दुर्लभ पुरावशेष है।इसमें अनेकों स्तूप, चैत्य, विहार (शैक्षणिक एवं आवासीय परिसर) में अनेकों विशाल भवन, आंगन, कुआं, नालियां, भवनों की नक्काशी, पत्थर और धातु पर उकेरी गयी कलाकृतियां आदि मौजूद हैं।यहां गगनचुम्बी तीन विशाल पुस्तकालय थे, इनमें एक नौ मंजिला था।यह धरोहर केवल नालंदा नहीं, बल्कि भारत के इतिहास और संस्कृति का प्रतिबिम्ब है।

उन्होंने कहा है कि विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद इस धरोहर का रखखाब भी विश्व स्तरीय होना चाहिए था।लेकिन अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि संस्कृति मंत्रलय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की उपेक्षा के कारण इसका रखरखाब काफी निम्न स्तरीय है।न्यास ने उनसे नालंदा विश्वविद्यालय के संपूर्ण भूभाग का उत्खनन कराने के लिए पहल करने का अनुरोध किया है।विश्व धरोहर नालंदा की हालत दयनीय एवं असुरक्षित है।श्री नालंदा महाविहार के चैत्यों से भगवान बुद्ध की विशाल प्रतिमाओं का दिन पर दिन क्षरण होता जा रहा है।

गच की प्रतिमाएं नष्ट हो रही हैं।यही हाल रहा तो कुछ दिनों में चैत्यों से भगवान बुद्ध की प्रतिमाएं विलुप्त हो जायेंगी।रखरखाब के अभाव में विहारों की दीवारें जहां तहां से गिरकर बिखर रही है।धरोहर की दीवारों पर घास -फूस के अलावे बड़े-बड़े पेड़ पौधो उग आये हैं।आउटसोर्सिंग के भरोसे इसका रखरखाब किया जाता है।\उन्होंने कहा है कि संस्कृति मंत्रलय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की इस उपेक्षा से विश्व धरोहर नालंदा के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा ही नहीं रहे हैं, बल्कि भारत की प्रतिष्ठा दुनिया के देशों में धुमिल हो रही ह।विश्व धरोहर दर्जा मिलने के बाद भी नालंदा अपनी दुर्दशा पर आँसू बहा रहा है।विदेशों में गंगा और नालंदा को लेकर गजब का आर्कषण है।

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