नेपुरा में तसर पर उकेरा जायेगा नालंदा का प्रतीक चिह्न

फोटो – तसर पर किये गये कामों का मुआयना करते लोग।

रिपोर्ट;राम विलास,नालंदा [ बिहार ]
राजगीर;-बामन बूटी साड़ी के बाद नेपुरा में नालंदा अंगवस्त्र तैयार किया जाएगा. इसकी कवायद शुरू हो गई है।नवंबर से इस वस्त्र को तैयार करने की प्लानिंग की गई है। इस प्लानिंग के तहत तसर वस्त्र पर विश्व धरोहर नालंदा का प्रतीक चिन्ह उकेरा जायेगा।यह कार्य केवल नेपुरा ही नहीं, बल्कि बिहार और भारत का पहला प्रयोग होगा।इस बाबत विश्व भारती शांति निकेतन के प्रो सुभाष चंद्र राय, नेतरहाट विद्यालय के रिटायर्ड शिक्षक डॉ मिथिलेश प्रसाद सिंह, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर स्मृति न्यास के अध्यक्ष नीरज कुमार एवं अन्य ने मंगलवार को नेपुरा का दौरा किया।

इस संबंध में नेपुरा के मशहूर तसर बुनकर विजय कुमार तांती से उन्होंने वार्ता की. ग्रामीणों की मौजूदगी में हुई यह वार्ता सफल रही. इसके लिए राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर स्मृति न्यास के द्वारा अग्रिम भुगतान भी किया गया।नेपुरा दौरे के बाद न्यास अध्यक्ष नीरज कुमार ने बताया कि नेपुरा तसर उद्योग के लिए विख्यात है।यहां के बने बावन बूटी साड़ी विदेशों में काफी लोकप्रिय हो रही है।जिस तरह बावन बूटी साड़ी विदेशों में धूम मचा रही है, उसी तरह नालंदा अंगवस्त्रम दुनिया खासकर बुद्धिस्ट कंट्री में काफी लोकप्रिय साबित होगा।ऐसा उन्हें उम्मीद है।

उन्होंने बताया कि तसर कपड़े के दोनों छोर पर प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष का प्रतीक चिन्ह उकेरा जाएगा।प्रतीक चिन्ह के नीचे नालंदा लिखा रहेगा।उन्होंने कहा कि यह अंग वस्त्र विभिन्न समारोहों के मौके पर मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों को स्वागत के दौरान दिया जाएगा।उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह अनोखा परंपरा साबित होगा।इससे नेपुरा के तसर बुनकरों को लाभ होगा।उनके रोजगार के अवसर बढ़ेगें. देशी – विदेशी समारोह में मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों को जब यह प्रदान किया जाएगा तो नालंदा का यह सौगात पा कर आनंदित तो होंगे ही उसे अपने साथ ले जाएंगे।

नीरज ने कहा कि न्यास द्वारा नवंबर में लखनऊ, नई दिल्ली, नालंदा एवं अन्य जगहों पर कई कार्यक्रमों का आयोजन होना तय है।उन समारोह में न्यास की ओर से अतिथियों को अंग वस्त्र के रूप में नेपुरा निर्मित नालंदा अंग वस्त्र से स्वागत किया जाएगा।उन्होंने कहा कि नालंदा में नालंदा विश्वविद्यालय, नव नालंदा महाविहार डीम्ड विश्वविद्यालय के अलावे जिला प्रशासन और बिहार सरकार द्वारा भी नालंदा अंगवस्त्रम को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।इस माध्यम से नालंदा को फिर से घर-घर तक पहुंचाने का प्रयास सफल हो सकता है।

इतना ही नहीं विदेशी खासकर बौद्ध धर्मावलंबी ऐसे अंग वस्त्र को पाकर बेहद खुश होंगे।नालंदा का प्रतीक चिन्ह के रूप में वह अपने साथ स्वदेश ले जाएंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नेपुरा के नालंदा वस्त्रम का अवलोकन करेंगे तो नालंदा अंग वस्त्रम की पहचान देश और दुनिया में बड़े पैमाने पर पहुंच सकता है।

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