पर्यावरणीय नुकसान के समाधान के लिए नालंदा विश्वविद्यालय टीम ने किया पहाड़ का दौरा

फोटो – गृद्धकूट पहाड़ी पर टीम सदस्य।

रिपोर्ट;ब्यूरो राम विलास,नालंदा [बिहार ]
राजगीर;-पर्वतीय इलाकों भूस्खलन से होने वाले जान-माल का नुकसान, पर्यावरण व वन आवरण की क्षति और मिट्टी का कटाव जैसी नुकसान का समाधान को ढूंढ़ने के लिए कुलपति प्रो. सुनैना सिंह के मार्गदर्शन में नालंदा विश्वविद्यालय ने एक अभियान की शुरुआत की है।इस अभियान के तहत विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ राजगीर की पंच पहाड़ियों पर पहुंच कर उसके संरक्षण से जुड़े तमाम पहलुओं का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं।इस अभियान को सफल बनाने के लिए नालंदा विश्वविद्यालय के पर्यावरण विशेषज्ञों, अंतर्राष्ट्रीय छात्रों और अंतर्विभागीय शोधार्थियों की एक 40 सदस्यीय टीम का गठन किया गया है।

इस टीम के संयोजक स्कूल ऑफ इकोलॉजी एंड एनवायरमेंट स्टडीज के डीन बनाये गये हैं।इस टीम ने अभियान के प्रथम चरण के तहत 28 अगस्त 2021 को राजगीर के वैभारगिरी पहाड़ पर पहुंच कर पहाड़ से संबंधित पर्यावरण और सांस्कृतिक पहलुओं का बारीकी से अध्ययन किया।उसके संरक्षण के उपायों पर विचार-विमर्श की।टीम ने पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, प्राकृतिक संसाधनों के अवैज्ञानिक दोहन ने पहाड़ी और आसपास के वन क्षेत्र के पर्यावरण और पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाने पर चिंता व्यक्त किया।

इस अभियान का हिस्सा बने स्कूल ऑफ इकोलॉजी एंड एनवायरनमेंट स्टडीज के एक शोध छात्र के मुताबिक, “वर्तमान में, कोविड -19 लॉकडाउन में ढील के बाद, पहाड़ पर अनियंत्रित तरीके से पर्यटकों का पहुंचना शुरु हो गया है।पर्यटन को अर्थव्यवस्था और रोजगार के आधार पर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। लेकिन जैव विविधता पर इसके प्रतिकूल प्रभाव, पारिस्थितिकी तंत्र से हो रही छेड़छाड़ की उपेक्षा भी नहीं की जा सकती है। ” अभियान के दौरान यह पाया गया कि अनियंत्रित पर्यटन ने पहाड़ी क्षेत्रों को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है।

इस अभियान में शिरकत करने वाले सदस्य, विशेषज्ञ और शोध छात्र राजगीर क्षेत्र के पर्यावरण, पारिस्थितिकी से संबंधित मुद्दों पर गहन मंथन कर रहे हैं।स्कूल ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज और स्कूल ऑफ हिस्टॉरिकल स्टडीज के शोध छात्रों ने कहा कि स्थानीय लोगों को संरक्षण से जुड़े सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं से अवगत कराकर उन्हें जागरुक अभियान चलाने की जरूरत है।उन्होंने दावा किया कि जागरुक होने के बाद स्थानीय समुदाय के लोग पर्यटन संबंधी गतिविधियों के साथ-साथ अपनी विरासत के संरक्षण के लिए अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

भारतीय विरासत के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए नालंदा विश्वविद्यालय ने राजगीर की स्थानीय पहाड़ियों की सुरक्षा के लिए यह पहल की है।इस मौके पर विश्वविद्यालय के स्टूडेंट अफेयर्स के कंसलटेंट डायरेक्टर भी टीम के साथ मौजूद रहे।उन्होने भी टीम के साथ अपना अनुभव साझा किया।कुलपति प्रो. सुनैना सिंह ने विश्वविद्यालय की टीम को बधाई दी और उम्मीद जताई कि ये टीम जल्द ही अपने लक्ष्य को हासिल करने में सफल होगी।

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