पहाड़ों के संरक्षण और विश्व शांति की दिशा में नालंदा विश्वविद्यालय का प्रयास एक कदम आगे

फोटो – ऐतिहासिक पहाड़ी का निरीक्षण करती टीम सदस्य।

रिपोर्ट;ब्यूरो राम विलास,नालंदा [ बिहार ]
राजगीर;-कुलपति प्रो.सुनैना सिंह की दूरदर्शी सोच और मार्गदर्शन के तहत नालंदा विश्वविद्यालय ने राजगीर में विश्व शांति और पहाड़ों के संरक्षण की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ाया है।राजगीर की पहाड़ियों की सांस्कृतिक, पौराणिक, पुरातात्विक, पारिस्थितिक और पर्यावरणीय विरासत को सहेजने की दिशा में नालंदा विश्वविद्यालय भागीरथी प्रयास कर रहा है।इसके लिए एक 40 सदस्यीय राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और छात्रों की टीम गठित की गई है।

टीम द्वारा प्रथम चरण में वैभारगिरी पहाड़ी पहुंच कर उसके संरक्षण से जुड़े कई पहलुओं का बारिकी से अध्ययन किया था।इसी प्रयास को आगे बढ़ाते हुए विश्वविद्यालय की वह टीम द्वारा चार सितंबर को गृद्धकूट पहाड़ी का भ्रमण और अध्ययन किया गया था।विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इकोलॉजी एंड एन्वायरन्मेंट स्टडीज के डीन के नेतृत्व में गृद्धकूट पहाड़ी पर पुरातात्विक और पर्यावरणीय महत्व से जुड़े तमाम पहलुओं का बारिकी से अध्ययन किया है।

टीम सदस्य ऐतिहासिक गृद्धकूट और उसके आस-पास के इलाकों से जुटाए गए आंकड़ों का विश्लेषण करने में जुटे हुए हैं।टीम विशेषज्ञों द्वारा प्रारंभिक अध्ययन में मानवीय लापरवाही और उचित निगरानी का अभाव को पहाड़ों के संरक्षण की दिशा में सबसे बड़ी रुकावट माना गया है।उन्होंने कहा कि गृद्धकूट पहाड़ी को पाली और संस्कृत बौद्ध साहित्य में सबसे शुभ स्थानों में से एक वर्णित किया गया है।यहीं पर गौतम बुद्ध द्वारा कई महत्वपूर्ण महायान सूत्रों की शिक्षा दी गयी थी।

उन सूत्रों में कुछ खास लोटस सूत्र (सद्धर्म-पुंडरिका सूत्र), सुरंगमा समाधि सूत्र, और हृदय सूत्र हैं।ये सभी सूत्रों का उद्देश्य विश्व शांति और मनुष्य के मंगल कामना से जुड़ा हुआ है।नालंदा विश्वविद्यालय की टीम ने विश्व भर में कोविड से पीड़ित लोगों की मंगल कामना और विश्व शांति के लिए इन्ही में से एक सूत्र हृद्य सूत्र का मंत्रोच्चारण उसी जगह पर किया, जहां पर कभी गौतम बुद्ध ने इस सूत्र की शिक्षा दी थी।इसके साथ ही विशेषज्ञों ने इस हृद्य सूत्र के महत्व के बारे में विस्तार से बताया।

नालंदा विश्वविद्यालय की टीम के विशेषज्ञों ने इस अभियान के दौरान पहाड़ों के संरक्षण में हो रही लापरवाही पर चिंता जताई है।उसके संरक्षण और समाधान पर गहन चर्चा की गयी।विश्वविद्यालय की टीम राजगीर की पहाड़ियों के संरक्षण की दिशा में लगातार काम कर रहा है।आने वाले दिनों में विशेषज्ञों की टीम दूसरी पहाड़ियों का अध्ययन करेगी।उसके संरक्षण से जुड़े तमाम आंकड़े जुटाएगी और उसका विश्लेषण करेगी।यह टीम न सिर्फ पहाड़ियों के संरक्षण बल्कि पहाड़ियों पर मौजूद पौराणिक विरासत और पुरातात्विक महत्व, संरक्षण के बारे में भी लोगों को जागरुक करेगी।

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