पीठाधीश्वर से महामंडलेश्वर बने स्वामी विवेक मुनि,राजगीर में खुलेगा वेद विद्यालय

महामंडलेश्वर की ताजपोशी करते शंकराचार्य

रिपोर्ट : ब्यूरो, राम विलास, नालंदा, बिहार।
राजगीर। विश्व में सुख – शांति और समृद्धि के लिए अधिकमास की पुरुषोत्तम एकादशी रविवार को धार्मिक और अध्यात्मिक तीर्थ राजगीर में साधु संतों के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हवन यज्ञ किया गया। गढ़ महादेव परिसर में आयोजित कार्यक्रम में हवन उपरांत राजगीर के बड़ी संगत के पीठाधीश्वर स्वामी विवेक मुनि जी महाराज को बिहार महामंडलेश्वर की ताजपोशी की गई।

जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी दिलीप योगी जी महाराज और राजगीर बड़ी संगत के पीठाधीश्वर स्वामी विवेक मुनि जी महाराज के सान्निध्य में हवन यज्ञ में कई संत और पुरोहित शामिल हुए। इस अवसर पर जगतगुरु शंकराचार्य ने अग्नि को साक्षी मानकर महामंडलेश्वर की घोषणा की। शंकराचार्य ने महामंडलेश्वर को मानव सुख, शांति, समृद्धि के लिए धर्म कर्म में जुट जाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि अधिकमास में राजगीर देश का सबसे पवित्र तीर्थ माना गया है। इस अवधि में ब्रह्मांड के 33 कोटि देवी – देवता राजगीर में कल्पवास करते हैं। अधिकमास के पहले एकादशी को पुरुषोत्तम एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन किया गया पूजा-पाठ, अर्चना – वंदना भगवान श्री लक्ष्मी नारायण को समर्पित होता है।

उन्होंने कहा कि अध्यात्म नगर राजगीर में शीघ्र वेद विद्यालय की स्थापना उनके द्वारा की जायेगी। उस वेद विद्यालय में छात्रों को नि:शुल्क आवासीय शिक्षा प्रदान की जायेगी। उन्होंने कहा कि विश्व में कहीं भी शांति नहीं है। आपसी प्रतिद्वंद्विता, आतंकवाद और वैश्विक महामारी कोरोना आदि से दुनिया त्रस्त है। विश्व में पुनः शांति, अमन – चैन और सुख – समृद्धि के लिए यह हवन यज्ञ में ईश्वर से यही प्रार्थना की गई है। पीठाधीश्वर से महामंडलेश्वर बने स्वामी विवेक मुनि महाराज ने दायित्व की रक्षा करने और सनातन धर्म व शिक्षा का अलख जगाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि भारत आदि अनादि काल से देवताओं, ऋषि – महर्षियों की भूमि रही है।

देवभूमि राजगीर में अधिकमास में राजकीय मेला का आयोजन हर तीन साल पर किया जाता है। लेकिन वैश्विक महामारी कोरोना काल के कारण इस वर्ष मेला का आयोजन नहीं हो सका है। शायद अधिक मास के इतिहास में पहली बार मेला का आयोजन नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि राजगीर की धरती, यहां के जंगल – पहाड़ और प्राकृतिक संपदा देवी – देवताओं को अनादि काल से आकर्षित करते रही है। यह देवताओं और ऋषि महर्षियों की रमणीय तथा आध्यात्मिक भूमि है। सनातन परंपरा की इस आदि भूमि को जागृत करने के लिए हर संभव उनके द्वारा प्रयास किया जायेगा।

महामंडलेश्वर ने कहा कि राजगीर देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। लेकिन जितना इसका सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व का वर्णन पुराणों में है, उतना धरातल पर नहीं दिखता है। राजगीर के पौराणिक, धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व को राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित करने के लिए वह कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि सदियों से राजगीर 22 कुंड और 52 गर्म जल की धाराओं के लिए सुविख्यात है। लेकिन वर्तमान में यहां नारद कुंड, श्रृंगीऋषि कुंड, गोदावरी कुंड, दुख हरणी आदि कुंड का अस्तित्व समाप्त हो गया है।

उन्होंने कहा कि सनातन धर्मावलंबियों के सहयोग से उन विलुप्त कुंडों को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जायेगा। इस हवन यज्ञ कार्यक्रम में महाशक्ति पीठ के राष्ट्रीय प्रचार मंत्री संत बाबूलाल, कबीर आश्रम के महंत प्रेम दास, हनुमानगढ़ी के महंत राजेंद्र दास, सुनील दास, पुरोहित परमानंद पाण्डेय, रघुनंदन पाण्डेय, निर्मल द्विवेदी, मिथिलेश पाण्डेय सहित दर्जनों लोग शामिल हुए।

Comments are closed.