पौधारोपण कार्यक्रम बने जन आंदोलन ;कुलपति


फोटो – पौधारोपण करते वाइस चांसलर

रिपोर्ट;-ब्यूरो राम विलास,राजगीर।
राजगीर;- नव नालंदा महाविहार डीम्ड यूनिवर्सिटी में आयोजित 15 दिवसीय संकल्प पर्व रविवार को संपन्न हो गया। इस अवसर पर यूनिवर्सिटी कैंपस, संस्कृति ग्राम, विपश्यना केंद्र में सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय वृक्ष बरगद, राजकीय वृक्ष पीपल, आंवला, बेल, आम और अशोक आदि का पौधारोपन किया गया। इस पौधारोपण कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफ़ेसर वैद्यनाथ लाभ, कुलसचिव प्रोफेसर राजेश रंजन, डॉक्टर निहारिका लाभ सहित शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मी एवं स्टूडेंट्स शामिल हुए। इस अवसर पर वाइस चांसलर प्रोफेसर वैद्यनाथ लाभ ने कहा कि पर्यावरण को स्वच्छ एवं स्वस्थ बनाने के लिए पौधारोपण आवश्यक है। पौधारोपण कार्यक्रम को वर्तमान परिवेश में जन आंदोलन बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक पौधारोपण कर ही हरित नालंदा बनाया जा सकता है। पौधारोपण से पृथ्वी पर न केवल हरियाली बढ़ेगी बल्कि पर्यावरण में भी सुधार होगा। उन्होंने कहा कि जिस तेजी से पेड़ पौधों की कटाई हो रही है, उसकी तुलना में पौधारोपण कम हो रहा है। जिसके कारण ग्लोबल वार्मिंग, मौसम का बिगड़ना और वायु प्रदूषण की समस्या सामने है।

पौधा रोपण करते कुलसचिव

उन्होंने कहा कि घरों, कार्यालयों, आहर- नहर, पइन-पोखर, ताल – तलैया, नदी – नाले के पास खाली जगह में अधिक से अधिक पौधारोपण किया जाना चाहिए। कुलसचिव प्रोफेसर राजेश रंजन ने कहा कि अनादि काल से इंसान और कुदरत के बीच गहरा रिश्ता है। पेड़ पौधों से केवल फल -फूल, अनाज, तन ढकने के लिए कपड़े घर बनाने के लिए उपस्कर ही नहीं बल्कि जीवनदायिनी ऑक्सीजन, औषधियां एवं अन्य जरूरत की चीजें मिलती है। उन्होंने कहा कि पेड़ पौधे जीवन का आधार और पर्यावरण संरक्षण का पर्याय है. पर्यावरणीय संकट को दूर करने के लिए अधिक से अधिक पौधारोपण करने पर उन्होंने जोर दिया। उन्होंने कहा कि पेड़ पौधों की अहमियत को अब सरकार और समाज के लोग समझने लगे हैं। इसीलिए सरकारी, गैर सरकारी और सामाजिक स्तर पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण का प्रचलन शुरू हो गया है। वैवाहिक कार्यक्रम जन्मदिन और श्राद्ध के मौके पर पेड़ पौधा बांटने और लगाने की संस्कृति का आगाज हो गया है। यह प्रकृति के लिए सुखद संदेश है। संस्कृति मंत्रालय के आदेश पर आयोजित इस संकल्प पर्व में यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर डॉक्टर धम्मा ज्योति, डॉक्टर दीपंकर लामा, डॉ अरुण कुमार यादव, डॉक्टर के के पांडे, डॉ राणा पुरुषोत्तम कुमार सिंह, डॉ अशोक कुमार, डॉ श्रीकांत सिंह, प्रवीण कुमार एवं अन्य ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।

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