प्रतिबंध के बावजूद ब्रह्मकुंड में हजारों लोगों ने किया स्नान, पुलिस – प्रशासन बनी रही मूकदर्शक

रिपोर्ट: ब्यूरो, राम विलास, नालंदा, बिहार
राजगीर;-वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण इस वर्ष अधिक मास में राजगीर तीर्थ में मलमास मेला का सरकारी आयोजन नहीं हो सका है। सरकार और जिला पदाधिकारी द्वारा अधिक मास में गर्म जल के कुंडों में स्नान पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। 16 अक्टूबर को अधिक मास समाप्त होगा। उसके पहले मौनी एकादशी मंगलवार को जिला प्रशासन के आदेश की धज्जियां उड़ई गई। पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में हजारों नर – नारियों ने सप्तधारा कुंड और ब्रह्मकुंड सहित गर्म जल के अन्य कुंडों में स्नान किया।

इसका फोटो और वीडियो पूरे दिन सोशल मीडिया पर वायरल होते रहा। पुलिस प्रशासन की लापरवाही से हुई यह घटना राजगीर में चर्चा का विषय बना हुआ है। पुलिस – प्रशासन के इस कृत्य से यहां के विभिन्न धर्मपीठों के संत महंत हतप्रभ हैं। उनका कहना है कि जिला और अनुमंडल प्रशासन द्वारा साधु संतों को मलमास मेला के ध्वजारोहण समारोह में शामिल होने और साही स्नान से भी रोका गया है। शासन प्रशासन के निर्देशों का स्थानीय संत महंत समाज के लोगों ने अक्षरस: अनुपालन किया।

लेकिन जिला प्रशासन के आदेश का उनके ही मातहत अधिकारियों और कर्मचारियों ने धज्जियां उड़ा दी। हुआ यह कि पुलिस प्रशासन की लुंज पुंज व्यवस्था को देखते हुए मौनी एकादशी को ब्रह्मकुंड क्षेत्र में स्नान करने वाले हजारों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा हो गई। जैसे ही नियमित पूजा के लिए सप्तधारा और ब्रह्मकुंड खोला गया, वैसे ही श्रद्धालु स्नान के लिए कुंड में प्रवेश कर गए। करीब पूरे दिन स्नान करने का सिलसिला चलते रहा।

कुंड स्नान के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ते रही। किसी को कोरोना वायरस का डर – भय नहीं सता रहा था। बेखौफ होकर श्रद्धालु स्नान करने में मशगूल रहे। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मूकदर्शक बनकर स्नान करने का नजारा देखते रहे। सूत्रों के अनुसार कोविड-19 के कारण बिहार सरकार द्वारा इस वर्ष मलमास मेला को स्थगित किया गया है।

अधिक मास में राजगीर तीर्थ के गंगा- यमुना और मार्कण्डेय कुंड को छोड़ सभी कुंडों को बंद रखने का सख्त निर्देश जिला प्रशासन द्वारा दिया गया है। डीएम के आदेश के बाद सभी कुंडों के प्रवेश द्वार में ताला लगा दिया गया था। निगरानी के लिए पहले मजिस्ट्रेट और पुलिस पदाधिकारी की भी तैनाती की गई थी। ताकि शासन और प्रशासन के आदेश का अनुपालन हो सके। स्थानीय लोगों की मानें तो पुलिस प्रशासन की लापरवाही से भीड़ जमा हुई और जिला प्रशासन के आदेश के विपरीत हजारों लोगों ने कुंड में स्नान किया।

सवाल उठ रहा है कि जिला प्रशासन द्वारा कुंडों में ताला लगाया गया था, तो फिर किसके आदेश से किसके द्वारा सप्तधारा और ब्रह्मकुंड का ताला खोला गया। डीएम के आदेश के अनुपालन में कोताही किसके द्वारा बरती गई है। मंगलवार की घटना से राजगीर के साधु-संतों में गहरी नाराजगी है। महामंडलेश्वर श्री अंतर्यामी शरण जी महाराज ने कहा कि जिला प्रशासन और अनुमंडल प्रशासन के निर्देशों का साधु समाज ने पालन किया। लेकिन सरकार के लोगों ने ही उनके आदेशों की धज्जियां उड़ा दी है। उन्होंने कहा कि अधिक मास में एक भी साधु समाज का सदस्य कुंड में प्रवेश तक नहीं किया है।

राजगीर तपोवन तीर्थ रक्षार्थ पंडा कमेटी के सचिव विकास उपाध्याय ने बताया कि अधिक मास में नियमित रूप से ब्रह्मकुंड की पूजा आरती की परंपरा है। पुजारियों के आने से पहले से ही एकादशी की सुबह ब्रह्मकुंड के मुख्य द्वार पर बड़ी संख्या में भीड़ जुटी थी। पुलिस के सहयोग से भीड़ को हटाया गया था। लेकिन बेकाबू भीड़ अनियंत्रित हो गई। एसडीओ संजय कुमार ने कहा कि यदि ऐसा हुआ है, तो बहुत गलत हुआ है। उन्होंने बताया कि मामले की जांचकर अपर अनुमंडल पदाधिकारी अमित अनुराग को रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है।

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