प्रो कामेश्वर प्रसाद की पुस्तक -” बुद्धिस्ट एजुकेशन इन अर्ली मेडिवल इण्डिया ” का लोकार्पण

फोटो – पुस्तक का लोकार्पण करते वीसी एवं अन्य।

रिपोर्ट;ब्यूरो राम विलास,नालंदा।
राजगीर;-नव नालंदा महाविहार सम विश्वविद्यालय, नालंदा में प्रो कामेश्वर प्रसाद की पुस्तक -” बुद्धिस्ट एजुकेशन इन अर्ली मेडिवल इण्डिया ” का लोकार्पण कुलपति प्रो वैद्यनाथ लाभ के हाथों किया गया । पटना विश्व विद्यालय के इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष तथा इतिहास व पुरातत्वविद प्रो कामेश्वर प्रसाद ने अपनी प्रस्तावना में कहा कि बौद्ध शिक्षा संस्थानों, महाविहारों का पराभव केवल बाहरी आक्रमण कारियों के कारण ही नहीं हुआ कि पुस्तकालय आदि जला दिए तथा व्यवस्था नष्ट कर दी गयी।अपितु नव ब्राह्मणवाद की स्थापना, तंत्रयान – महायान के विकास के कारण महाविहारों का भ्रष्टाचरण का केंद्र बनना , सामाजिक आर्थिक व्यवस्था में बदलाव, सामन्ती आर्थिक विकास, राजनैतिक अराजकता आदि भी महत्त्वपूर्ण कारक भी उत्तरदायी हैं।

लोकार्पण करते हुए कुलपति प्रो वैद्यनाथ लाभ ने कहा कि यह पुस्तक प्रो आर सी मजूमदार की पुस्तक के बाद इस विषय की सबसे प्रासंगिक पुस्तक मानी जाएगी। उन्होंने बुद्ध को निरंतर चारिका करते रहने वल बताया तथा स्वयं दृष्टांत बने। वे बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय को आधार देने वाले व्यक्ति थे। बौद्ध पृष्ठभूमि सनातन परम्परा से ही निकल कर आती है। शिष्यों की वजह से बुद्ध वचन की परम्परा अक्षुण्ण रही। बाद में विहार शैक्षिक संस्थान का रूप धारण करने लगे। अशोकाराम, कुक्कुटा राम आदि शिक्षा संस्थान बने। विहार न बस्ती से बहुत दूर होते थे न ही बहुत पास।

कार्यक्रम के अध्यक्ष चित्तरंजन प्रसाद सिन्हा ने कहा कि इतने सारे शैक्षिक संस्थान एक साथ क्यों और कैसे विकसित हुए , इस पर विचार की आवश्यकता है। नालंदा में फ़ाइन आर्ट्स , मूर्ति कला आदि पढ़ाई होती थी। पाल आर्ट न कह कर इसे नालंदा आर्ट कहना चाहिए । बिम्बिसार जैसे कलाकार को भी याद किया जाना चहिए।

उमेश चंद्र द्विवेदी ने महाविहारों का विवरण प्रस्तुत किया। डॉ विश्वजीत कुमार , डॉ एस पी सिन्हा तथा सुशीम दुबे ने भी विचार व्यक्त किए । संचालन सुनीता भारती ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो रवींद्र नाथ श्रीवास्तव “परिचय दास” ने किया। उन्होंने सबके विचारों का समाहार प्रस्तुत किया । उनकी दृष्टि में नालंदा के ज्ञान और बौद्ध शिक्षा परम्परा की श्रेष्ठता को आज अधार बना कर प्रगति का पथ चुन जा सकता है।
लोकार्पण में डॉ नीहारिका लाभ के साथ महाविहार के आचार्य व शोध छात्र उपस्थित थे।

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