पढ़ाई के उम्र में कोर्ट परिसर में चाय बांटने को मजबूर है नाबालिग

अंजुम आलम की रिपोर्ट
जमुई: एक ओर केंद्र व राज्य सरकार द्वारा बाल मज़दूरी को खत्म करने के लिए नित्य नए-नए कानून बना रही है तो वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय में आये दिन बाल मजदूरी करते नाबालिग को देखा जा रहा है। कभी होटलों में,कभी चाय की दूकान में तो कभी ईंट भट्ठे पर काम कर बच्चों का बचपन सिसक रहा है। इसी बीच शनिवार को व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में एक 10 वर्षीय नाबालिग न्यायधीशों को चाय पिलाता दिखा। जिसपर न्याय पालन कराने की जिम्मेवारी है उसी के कार्यक्रम में एक नाबालिग द्वारा न्यायधीशों व न्यायकर्मियों को चाय पिलाना बाल-मज़दूर अधिनियम पर एक सवाल खड़ा करता है। हालांकि पढ़ाई के उम्र में नाबालिग बालक के हाथों से न्यायाधीश,न्याय कर्मी सहित विभिन्न विभागीय पदाधिकारियों ने चाय का भरपूर मज़ा लिया लेकिन पढ़ाई के उम्र में विद्यालय की जगह सड़कों पर भटकते बचपन पर किसी अधिकारियों व न्यायकर्मियों की नज़र नहीं पड़ी। न ही किसी पदाधिकारियों ने नाबालिग को सही दिशा-निर्देश देना उचित नहीं समझा। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि इधर सरकार बाल सुरक्षा कानून बना रहे हैं तो उधर पदाधिकारी इस कानून का उलंघन करने में लगे हैं। इस सम्बंध में श्रम अधीक्षक सुबोध कुमार ने बताया कि सरकार द्वारा 14 वर्ष तक के नाबालिग को बाल सुरक्षा कानून के तहत रहने, खाने और पढ़ाने का निःशुल्क व्यवस्था की गई है।अगर नाबालिग चाय बेच रहा है तो ये गलत है। जांच कर नाबालिग को मुक्त कराया जाएगा।और प्रक्रिया के तहत उचित कार्रवाई की जाएगी।

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