बनेंगे ग्रामीण पर्यटन स्थल तो मिलेंगे रोजगार के अवसर

फोटो – नालंदा धरोहर

रिपोर्ट; राम विलास राजगीर
राजगीर;-असीम संभावनाओं के बावजूद नालंदा में ग्रामीण पर्यटन का विकास नहीं हो रहा है. ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और रोजगार सृजन करने के लिए यह आवश्यक है . वैश्विक महामारी को 9:00 सर्वत्र तबाही मचा रखा है रोजी रोजगार नहीं मिल रहे हैं गांव के गरीब दाने हटाने के लिए तरस रहे ऐसी प्रतिकूल परिस्थिति में ग्राम में पर्यटन रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है नालंदा के कई गांव ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और धार्मिक महत्व के हैं. यथा चंडीमौ, घोसरावा, तेल्हाड़ा, वेश्वक, धुरगांव आदि गांवों का ग्रामीण पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रोजगारोन्मुखी बनाया जा सकता है. इन गांवों में कुटीर उद्योग, हस्तकला, दस्तकारी, कशीदाकारी आदि कारोबार को प्रोत्साहित कर रोजगार का नवसृजन कर बेरोजगारी दूर की जा सकती है. इससे गांव की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ तो होगी ही पलायन पर भी रोक लगेगा. वैश्विक महामारी के डर से महानगरों से लौटे प्रवासियों और ग्रामीणों को इसके माध्यम से रोजगार के अवसर प्रदान किए जा सकते हैं. पर्यटन के बदलते स्वरूप में पर्यटकों को शहरी जीवनशैली अब पसंद नहीं आ रही है. वे शहरी शोरगुल और प्रदूषण से बचने के लिए ग्रामीण पर्यटन की ओर रुख करने को बेताब हैं. गांवो की सादगी, ईमानदारी, खातिरदारी, मेहमाननवाजी देखकर सैलानी गांव की ओर खिंचे चले आयेगे. नालंदा, राजगीर और पावापुरी सरीखे पर्यटन स्थलों में सैर व विरासत दर्शन के लिए लाखों देशी-विदेशी सैलानी हर साल आते हैं. उससे लाखों लोगों को प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप में रोजगार मिलता है. हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, गुजरात आदि राज्यों में ग्रामीण पर्यटन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है. नालंदा के उन ऐतिहासिक गांवो में पर्यटकीय सुविधाएँ उपलब्ध कराकर जनहित में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं.

चंडीमौ – सिलाव प्रखंड का यह गांव बौद्ध और सनातन धर्म धर्मावलंबियों की आस्था का केंद्र रहा है. शुंगकालीन तालाब के पास अंबलट्टिका वन था. बौद्ध महत्व के टीले की खुदाई में बौद्ध विहार और बहुमूल्य पूरावशेष मिले हैं.

घोसरावां – पावापुरी के पास घोसरावां
ही यशोवर्मनपुर विहार के नाम से विख्यात था. संघाराम के अलावे वहां गगनचुंबी बौद्ध और माता तारा मंदिर था, जो आस्था का प्रतीक था. तेतरावा में भगवान बुद्ध की विशाल प्रतिमा है, जिसे भैरव बाबा के नाम से ग्रामीण पूजते हैं.

तेल्हाड़ा – प्राचीन काल में वहां तिलाधक विश्वविद्यालय था. सीएम नीतीश कुमार के पहल से उसका उत्खनन कराया गया है. वहां अनेकों भवन और पूरावशेष मिले हैं. यहां फिर से चल पहले बढ़ेगी तो, वर्षो से उपेक्षित स्थान फिर से गुलजार हो सकता है.

वेशवक – इसका इतिहास भगवान श्री कृष्ण की पत्नी रुक्मणी के पिता भीष्मक की राजधानी बताई जाती है. वहां राजा का किला, सेना भवन, जेल के अलावे बहुमूल्य पूरावशेष मिले हैं. अकबर सेनापति मानसिंह द्वारा कश्मीर के तत्कालीन शासक युसूफ शाह और हैदर अली को इसी जेल में कैद कर रखा गया था.

जुआफर – एएसआई द्वारा उत्खनन में ‘मग्ग’ सील, एनबीपी बर्तन के टुकड़े सहित बहुमूल्य पूरावशेष वहां मिले हैं. इसके आधार पर यह महामहामोग्लान की जन्मभूमि हो सकती है. पुरातत्वविदो के अनुसार यह स्थान करीब 1200 ईसा पूर्व का प्रतीत होता है.

धुरगांव – यह महाकश्यप की जन्मस्थली बताई जाती है. करीब 50 एकड़ में फैले टीले से देवीपारमिता का आदमकद प्रतिमा सहित वहां सैकड़ों दुर्लभ पुरावशेष मिले हैं.

— एसडीओ – सीओ ने डीएम को नहीं भेजा रिपोर्ट

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा नालंदा में ग्रामीण पर्यटन के विकास के लिए पर्यटन विभाग के प्रधान सचिव और जिलाधिकारी नालंदा को आदेश दिया गया है. जिलाधिकारी द्वारा राजगीर और हिलसा एसडीओ से संबंधित जगहों की रिपोर्ट तलब की गई है. लेकिन महीनों गुजर जाने के बाद भी सिलाव, गिरियक, इस्लामपुर और एकंगरसराय सीओ के द्वारा रिपोर्ट नहीं भेजी जा सकी है. फलस्वरूप सीएम के आदेश के बाद भी इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है .

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