बिहार का सकल घरेलू उत्पाद राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद की तुलना में बेहतर


रिपोर्ट;ब्यूरो अभिजीत पांडेय,पटना।
पटना;-बिहार का सकल घरेलू उत्पाद भारत के सकल घरेलू उत्पाद की तुलना में बेहतर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक बिहार का सकल घरेलू उत्पाद 10.5 फीसदी है, जबकि भारत का 9.3 फीसदी। वर्ष 2019-2020 में वर्तमान मूल्य पर बिहार का सकल राज्य घरेलू उत्पादन (SGDP) 6,11.804 करोड़ रुपए और 2011-12 के स्थिर मूल्य पर 4,14,977 करोड़ रुपए रहा। वहीं, 2019-2020 में राज्य में निवल राज्य घरेलू उत्पाद वर्तमान मूल्य पर 5,62,710 करोड़ रुपए और स्थिर मूल्य पर 3,77,376 रुपए रहा। इस आधार पर प्रति व्यक्ति सकल राज्य घरेलू उत्पाद वर्तमान मूल्य पर 47,641 से बढ़कर 50,735 रुपए हो गया है।

सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि वृद्धि वर्ष 2019-20 में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की अनुमानित वृद्धि दर घटी है, जबकि बिहार में इस दौरान दो अंकों में वृद्धि दर दर्ज की गई। वर्ष 2018-19 में ये 9.3 फीसदी थी, जबकि 2019-20 में बिहार की अर्थव्यवस्था में 10.5 फीसदी वृद्धि हुई। यह भारतीय अर्थव्यवस्था की अपेक्षा उच्च वृद्धि दर थी, जिसका मुख्य कारण राज्य में तृतीयक क्षेत्र में अधिक वृद्धि दर है, जो 11.2 है, जबकि दो अन्य क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम दर से वृद्धि हुई है।

बिहार पर कर्ज का बोझ बढ़ गया है। साल 2019-2020 में यह करीब 13 फीसदी बढ़कर 1,90,899 करोड़ हो गया है। हालांकि केन्द्र सरकार से राज्य को मिले कर्ज में कमी आई है और 2534 करोड़ से घटकर 1279 करोड़ हो गया है। वहीं आंतरिक ऋण 16,134 करोड़ से 27,866 करोड़ हो गया। बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2020-2021 में बताया गया है कि कोरोना की मार ने इस बार बिहार की अर्थव्यवस्था को जबदस्त झटका दिया है।

राजकोषीय घाटा निर्धारित सीमा के अंदर ही रहा
इस वर्ष राजकोषीय घाटा सकल राज्य घरेलू उत्पाद के 2.9 फीसदी रहा, जो साल 2018-19 में 2.0 रहा था। इसे तीन फीसदी से कम होना जरूरी है।

2019-20 में अर्थव्यवस्था के मुख्य वाहकों की वृद्धि दर में जबदस्त 6 फीसदी गिरावट रही। कृषि, वानिकी और मत्यसिकी की विकास दर में गिरावट आई है, जबकि पथ परिवहन एवं परिवहन संबंधी सेवाओं में तेजी आई है। वहीं, विद्युत, गैस, जलापूर्ति सेवाओं में (20.3 फीसदी), प्रसारण सेवाओं में (11.7फीसदी), पथ परिवहन (15.2 फीसदी) और लोक प्रशासन में (11.3 फीसदी) योगदान रहा। सर्वेक्षण में यह उम्मीद जताई गई कि प्राथमिक क्षेत्र में वृद्धि की क्षमता से राज्य को आने वाले वर्षों में उच्च विकास दर दर्ज करने में मदद मिलेगी।

वर्ष 2018-19 में बिहार में कुल राजस्व प्राप्ति 1,31,793 करोड़ रही थी, जो इस बार घटकर 1,24,233 रह गई है और इसमें करीब 5.3 फीसदी गिरावट हुई है। राजस्व प्राप्ति में हुई गिरावट ने राज्य में राजस्व व्यय पर भी असर डाला है और वह 1,23,533 करोड़ रुपए है। राज्य का बजट अधिशेष इस बार 2004-05 के बाद अपने न्यूनतम स्तर 699 करोड़ पर पहुंच गया है। राज्य सरकार को पुलिस-प्रशासन ने अनुमान से ज्यादा राजस्व जुटा कर दिया है। बजट अनुमान के मुताबित 53 करोड़ पुलिस को और 23 करोड़ राजस्व अन्य प्रशासनिक सेवाओं को देना था, जबकि पुलिस ने 96 करोड़ और प्रशासनिक सेवाओं ने 137 करोड़ राजस्व दिया है। डायरेक्ट कर में सबसे अधिक राजस्व 2713 करोड़ वाहन कर से सरकार को मिला है, जबकि विद्युत शुल्क और कर से 440 करोड़ मिले हैं। सबसे अधिक झटका सरकार को भूमि राजस्व कर से मिला है और इसमें 1100 करोड़ के अनुमानित बजट के उलट 440 करोड़ ही राजस्व मिल पाया है।

बिहार का सकल घरेलू उत्पाद राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद की तुलना में बेहतर
रिपोर्ट;ब्यूरो अभिजीत पांडेय,पटना।
पटना;-बिहार का सकल घरेलू उत्पाद भारत के सकल घरेलू उत्पाद की तुलना में बेहतर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक बिहार का सकल घरेलू उत्पाद 10.5 फीसदी है, जबकि भारत का 9.3 फीसदी। वर्ष 2019-2020 में वर्तमान मूल्य पर बिहार का सकल राज्य घरेलू उत्पादन (SGDP) 6,11.804 करोड़ रुपए और 2011-12 के स्थिर मूल्य पर 4,14,977 करोड़ रुपए रहा। वहीं, 2019-2020 में राज्य में निवल राज्य घरेलू उत्पाद वर्तमान मूल्य पर 5,62,710 करोड़ रुपए और स्थिर मूल्य पर 3,77,376 रुपए रहा। इस आधार पर प्रति व्यक्ति सकल राज्य घरेलू उत्पाद वर्तमान मूल्य पर 47,641 से बढ़कर 50,735 रुपए हो गया है।

सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि वृद्धि वर्ष 2019-20 में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की अनुमानित वृद्धि दर घटी है, जबकि बिहार में इस दौरान दो अंकों में वृद्धि दर दर्ज की गई। वर्ष 2018-19 में ये 9.3 फीसदी थी, जबकि 2019-20 में बिहार की अर्थव्यवस्था में 10.5 फीसदी वृद्धि हुई। यह भारतीय अर्थव्यवस्था की अपेक्षा उच्च वृद्धि दर थी, जिसका मुख्य कारण राज्य में तृतीयक क्षेत्र में अधिक वृद्धि दर है, जो 11.2 है, जबकि दो अन्य क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम दर से वृद्धि हुई है।

बिहार पर कर्ज का बोझ बढ़ गया है। साल 2019-2020 में यह करीब 13 फीसदी बढ़कर 1,90,899 करोड़ हो गया है। हालांकि केन्द्र सरकार से राज्य को मिले कर्ज में कमी आई है और 2534 करोड़ से घटकर 1279 करोड़ हो गया है। वहीं आंतरिक ऋण 16,134 करोड़ से 27,866 करोड़ हो गया। बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2020-2021 में बताया गया है कि कोरोना की मार ने इस बार बिहार की अर्थव्यवस्था को जबदस्त झटका दिया है।

राजकोषीय घाटा निर्धारित सीमा के अंदर ही रहा
इस वर्ष राजकोषीय घाटा सकल राज्य घरेलू उत्पाद के 2.9 फीसदी रहा, जो साल 2018-19 में 2.0 रहा था। इसे तीन फीसदी से कम होना जरूरी है।

2019-20 में अर्थव्यवस्था के मुख्य वाहकों की वृद्धि दर में जबदस्त 6 फीसदी गिरावट रही। कृषि, वानिकी और मत्यसिकी की विकास दर में गिरावट आई है, जबकि पथ परिवहन एवं परिवहन संबंधी सेवाओं में तेजी आई है। वहीं, विद्युत, गैस, जलापूर्ति सेवाओं में (20.3 फीसदी), प्रसारण सेवाओं में (11.7फीसदी), पथ परिवहन (15.2 फीसदी) और लोक प्रशासन में (11.3 फीसदी) योगदान रहा। सर्वेक्षण में यह उम्मीद जताई गई कि प्राथमिक क्षेत्र में वृद्धि की क्षमता से राज्य को आने वाले वर्षों में उच्च विकास दर दर्ज करने में मदद मिलेगी।

वर्ष 2018-19 में बिहार में कुल राजस्व प्राप्ति 1,31,793 करोड़ रही थी, जो इस बार घटकर 1,24,233 रह गई है और इसमें करीब 5.3 फीसदी गिरावट हुई है। राजस्व प्राप्ति में हुई गिरावट ने राज्य में राजस्व व्यय पर भी असर डाला है और वह 1,23,533 करोड़ रुपए है। राज्य का बजट अधिशेष इस बार 2004-05 के बाद अपने न्यूनतम स्तर 699 करोड़ पर पहुंच गया है। राज्य सरकार को पुलिस-प्रशासन ने अनुमान से ज्यादा राजस्व जुटा कर दिया है। बजट अनुमान के मुताबित 53 करोड़ पुलिस को और 23 करोड़ राजस्व अन्य प्रशासनिक सेवाओं को देना था, जबकि पुलिस ने 96 करोड़ और प्रशासनिक सेवाओं ने 137 करोड़ राजस्व दिया है। डायरेक्ट कर में सबसे अधिक राजस्व 2713 करोड़ वाहन कर से सरकार को मिला है, जबकि विद्युत शुल्क और कर से 440 करोड़ मिले हैं। सबसे अधिक झटका सरकार को भूमि राजस्व कर से मिला है और इसमें 1100 करोड़ के अनुमानित बजट के उलट 440 करोड़ ही राजस्व मिल पाया है।

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