बिहार के पूर्व मुख्यमंत्रियों को बड़ा झटका, अब खाली करना होगा सरकारी बंगला

सोनू मिश्रा की रिपोर्ट
पटना: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिले आजीवन सरकारी आवास की सुविधा पटना हाईकोर्ट ने मंगलवार को समाप्त कर दी। पटना हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि अब बिहार में सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास खाली करना होगा। मुख्यमंत्रियों के आजीवन सरकारी बंगले की सुविधा को खत्म करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने इसका फैसला सुरक्षित रखा था, जिसपर कोर्ट ने फैसला सुनाया है। मामले पर चीफ जस्टिस एपी शाही की खंडपीठ ने ये फैसला सुनाया है जिसके बाद कोर्ट के इस निर्देश के बाद कई पूर्व मुख्यमंत्रियों से बंगला छिन जाएगा। बता दें कि राज्य सरकार की तरफ से सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को यह सुविधा मिली हुई थी। इसके साथ ही सरकारी बंगले में असीमित खर्च करने की छूट को हाई कोर्ट ने असंवैधानिक घोषित कर दिया है और कहा है कि पब्लिक के पैसे से अब आराम तलबी नहीं चलेगी। कोर्ट ने कहा कि एमएलए एवं एमएलसी की हैसियत से फ्लैट रख सकते हैं, लेकिन एक्स सीएम की हैसियत से मिले बंगले को अब छोड़ देना होगा। पटना हाईकोर्ट के इस फैसले से कई पूर्व मुख्यमंत्रियों के सरकारी आवास छिन जाएंगे। जिसमें लालू यादव, राबड़ी देवी, सतीश प्रसाद सिंह के साथ ही डॉक्टर जगन्नाथ मिश्रा, जीतन राम मांझी को भी अपना आवास छोड़ना पड़ेगा। आपको बता दें उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बाद अब बिहार तीसरा राज्य है जहां कोर्ट के फैसलों के बाद पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला खाली करना होगा. इससे पहले जहां सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगले खाली करने का आदेश दिया था वहीं एमपी में जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य की शिवराज सरकार को निर्देश दिया था कि पूर्व मुख्यमंत्रियों के सरकारी बंगले एक महीने में खाली कराए जाएं. कोर्ट के आदेश के बाद एमपी में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, उमा भारती, कैलाश जोशी और बाबूलाल गौर को सरकारी बंगला खाली करना था वहीं उत्तर प्रदेश में भी पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव, मायावती, कल्याण सिंह और राजनाथ सिंह ने सरकारी बंगला खाली कर दिया था. जीतन राम मांझी ने कहा कि बिहार सरकार का तेजस्वी प्रसाद के साथ बंगला विवाद था। तेजस्वी को उपमुख्यमंत्री के रूप में जो मकान मिला था उसे खाली करवाने की कवायद की गई थी। एक बंगले को लेकर इतनी कवायद नहीं करनी चाहिए थी। वह सुप्रीम कोर्ट चले गए थे। हो सकता है कि उसी कवायद में हाई कोर्ट ने यह फैसला दिया हो। मांझी ने कहा कि कोर्ट का फैसला सर्वमान्य है। मैं पूर्व मुख्यमंत्री होने के साथ वर्तमान में विधायक भी हूं। मुख्यमंत्री चाहें तो इस बंगले को सेंट्रल पूल में रखकर मुझे आवंटित कर सकते हैं। वैसे में सात बार विधायक रहा हूं। सरकार मेरे लायक जो आवास देगी मैं उसमें चला जाऊंगा।

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