मनोरोगियों को इलाज के लिए अब रांची जाने की जरूरत नहीं – प्राचार्य डॉ पीके चौधरी

फोटो – विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आयोजित समारोह में प्राचार्य डॉ पवन कुमार चौधरी एवं अन्य

रिपोर्ट;ब्यूरो राम विलास ,नालंदा [ बिहार ]
राजगीर;-बदलते जीवन शैली और कोरोना से बने आर्थिक तंगी के कारण मानसिक अवसाद के मामले बढ़ते जा रहे हैं।पहले जहां ऐसे मरीज इलाज कराने से परहेज करते रहे हैं।अब अवसाद से पीड़ित लोग लगातार परामर्श और इलाज के लिए आ रहे हैं। वर्धमान आयुर्विज्ञान संस्थान, पावापुरी ( विम्स) में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित समारोह का उद्घाटन करने के बाद संस्थान के प्राचार्य डा पवन कुमार चौधरी ने शनिवार को यह कहा है।
इस वर्ष की थीम असामान्य दुनिया में मानसिक स्वास्थ्य विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि कोरोना ने समाज में गहरी असमानता पैदा कर दिया है।इस दौरान गरीब और गरीब हो गए जबकि अमीर और अमीर हो गए हैं।उन्होंने कहा कि यहाँ के मानसिक रोगियों को अब बाहर जाने की जरूरत नहीं है।पहले मनोरोगियों के इलाज के लिए रांची ले जाते थे।अब पावापुरी में उनके इलाज की मुकम्मल व्यवस्था है।बिहार के मनोरोगियों के लिए रांची के विकल्प के रूप में पावापुरी को तैयार किया जा रहा है।

मनोरोग विभाग को राज्य स्तरीय पहचान देने का प्रयास किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि पावापुरी में मनोरोग में शीघ्र पीजी की पढ़ाई आरंभ होगी।डॉ चौधरी ने कहा कि मानसिक अवसाद के इलाज के लिए पहले यहां कम लोग पहुंचे थे।अब लोगों में जागरूकता बढ़ रही है. उनकी संख्या लगातार बढ़ रही है।उन्होंने कहा कि पहले इस इलाके में मानसिक रोग के इलाज की बेहतर सुविधा उपलब्ध नहीं थी।जिसके कारण लोग रांची और बड़े शहरों में जाकर इलाज कराना मजबूरी थी।

मनोरोगियों को काउंसलिंग के लिए बार-बार जाना संभव नहीं हो पाता था।वैसे मरीजों की समस्या का निदान पावापुरी मेडिकल कॉलेज में कर दिया गया है। केवल नालंदा, नवादा, शेखपुरा एवं अन्य जिलों के मरीज ही नहीं, बल्कि बिहार के मनोरोगियों के लिए पावापुरी को रांची का विकल्प बनाया जा रहा है। विम्स अधीक्षक डॉ ज्ञान भूषण ने कहा मन में नकारात्मक सोच उत्पन्न होने लगे, तो चिकित्सकों से परामर्श लेना चाहिए।उन्होंने कहा कोरोना सभी को परेशान कर दिया है।

उस काल में आर्थिक, सामाजिक, पारिवारिक और मानसिक परेशानियों से लोगों को जूझना पड़ा है।उसके अवसाद से अभी भी लोग बाहर नहीं निकल पाए हैं।जिसके कारण मानसिक परेशानियां बढ़ रही है।विम्स के मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ अमरजीत कुमार ने कहा कि कोरोना से दुनिया में असमानता बढ़ी है।
आर्थिक तंगी के कारण मानसिक परेशानी बढ़ी है।स्वास्थ्य पर इसका सीधा प्रतिकूल असर पड़ा है। इस कारण घरेलू हिंसा, बाल हिंसा आदि अपराधिक घटनाएं बढ़ी हैं।

विश्व युद्ध जैसा मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ा है।उन्होंने कहा कि मन में घबराहट, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा, कमजोरी और बेचैनी आदि जैसी महसूस हो तो चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में डेढ़ गुणा मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ी है।यहां मानसिक रोगियों के काफी मामले आते हैं।उनमें सबसे ज्यादा शराब और घरेलू कलह, घरेलू हिंसा, नारी उत्पीड़न और प्रेम में पड़े लोगों से संबंधित होते हैं।

मरीजों को काउंसलिंग के साथ दवा देकर उपचार किया जाता है।उन्होंने बताया कि मानसिक अवसाद से पीड़ित कुछ लोग इलाज कराने नहीं पहुंचते हैं। क्योंकि उनके मन में बैठा रहता है कि मानसिक रोग का मतलब पागलपन होता है।जबकि ऐसा कुछ नहीं है. वर्तमान जीवन शैली कुछ ऐसी है कि लोग अवसाद को झेल रहे हैं।उनके अनुसार मानसिक रोग बढ़ने की सबसे बड़ी वजह घरेलू समस्या, पति – पत्नी के बीच विवाद, आर्थिक समस्या, दबाव, रोजगार के संकट, महंगाई, प्रेम प्रसंग, शराब, नशा एवं अन्य है।

इस अवसर पर डॉ विनय कुमार, डॉ अनंत कुमार वर्मा एवं अन्य ने विचार व्यक्त किया। डॉ राजीव कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर कॉलेज के कई प्राध्यापक, चिकित्सक, स्वास्थ्य कर्मी और बड़ी संख्या में मरीज उपस्थित थे।

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