मलमास मेला के पहले दिन किया जाएगा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ परंपरागत ध्वजारोहन

रिपोर्ट : ब्यूरो राम विलास, नालंदा, बिहार
राजगीर ;-18 सितंबर से एक महीना तक लगने वाला राजकीय मलमास मेला, राजगीर ( नालंदा, बिहार) का आयोजन इस वर्ष नहीं हो सकेगा। मलमास को अधिक मास और पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण सरकार ने इस वर्ष मलमास मेला का आयोजन नहीं करने का निर्णय लिया है।
— तीर्थ पुरोहित करेंगे 33 कोटि देवी-देवताओं का आवाहन
बावजूद राजगीर-तपोवन तीर्थ रक्षार्थ पंडा कमेटी द्वारा ध्वजारोहण कार्यक्रम की परंपरागत औपचारिकता पूरी करने की तैयारी की जा रही है। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ ध्वजारोहण कर 33 कोटि देवी-देवताओं को आवाहन करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। उस परंपरा का निर्वहन इस वर्ष भी 18 सितंबर को शुभ मुहूर्त में किया जाएगा। ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बेगूसराय सिमरिया घाट के पीठाधीश्वर स्वामी चिदात्मन जी महाराज उर्फ फलाहारी बाबा और अयोध्या गोलाघाट के पीठाधीश्वर स्वामी सिया किशोरी शरण दास जी को आमंत्रित किया गया है।

पंडा कमिटी के सेक्रेटरी विकास उपाध्याय ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले मलमास मेला के ध्वजारोहण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शामिल हुए थे। मुख्यमंत्री के ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल होने से मेले की गरिमा तो बढ़ी ही थी। मेला की प्रशासनिक व्यवस्था भी कुम्भ मेलों की तरह की गई थी। नीतीश कुमार बिहार के पहले मुख्यमंत्री हैं, जो मलमास मेला के ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस बार भी पंडा कमेटी का प्रयास है कि ध्वजारोहण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राज्यसभा सदस्य सांसद रामचंद्र प्रसाद सिंह शामिल हों इसके लिए वार्ता की जा रही है।

यह सर्वविदित है कि प्रत्येक तीन साल पर मगध साम्राज्य की ऐतिहासिक राजधानी और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन केंद्र राजगीर में मलमास मेला का राजकीय आयोजन किया जाता रहा है। आदि अनादि काल से लगने वाले इस मलमास मेला में देश और दुनिया के लाखों – करोड़ों श्रद्धालु राजगीर आते रहे हैं। यहां के गर्म जल के कुंडों, झरनों और नदियों में स्नान कर शरीर के मैल के साथ-साथ मन के मैल को भी धोते रहे हैं। लेकिन इस बार वैश्विक महामारी कोविड-19 ने मेला के आयोजन पर तलवार लटका दी है।

मेले में श्रद्धालुओं और तीर्थ यात्रियों की अपार भीड़ जुटना लाजमी है, जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन होना मुश्किल ही नहीं असंभव भी है। इन्हीं कारणों से बिहार सरकार ने इस वर्ष मलमास मेला के राजकीय आयोजन पर रोक लगा दी है। इस आशय का आदेश राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के विशेष सचिव डॉक्टर श्यामल किशोर पाठक द्वारा जारी किया गया है। नालंदा डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट योगेंद्र सिंह के निर्देश पर राजगीर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने राजगीर-तपोवन तीर्थ रक्षार्थ पंडा कमिटी और बुद्धिजीवियों की बैठक बुलाकर सरकार के निर्णय से अवगत करा दिया है।

विश्वकर्मा पूजा के संपन्न होने के दूसरे ही दिन 18 सितंबर 2020 से मलमास मेला शुरू होना था। एक महीना तक चलने वाला यह मलमास मेला 16 अक्टूबर 2020 तक चलता। सरकार के निर्णय के बाद डीएम योगेन्द्र सिंह द्वारा मलमास मेला के दौरान होने वाले सभी कार्यक्रमों को रद्द करने का आदेश जारी किया गया है । वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रभाव व प्रसार को देखते हुए बिहार सरकार ने यह बड़ा निर्णय लिया है। इधर सनातन धर्मावलंबियों ने भी सरकार के निर्णय का स्वागत किया है।

साधु, संत, महंत एवं गृहस्थ श्रद्धालुओं का मानना है कि मेला में सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन होना संभव नहीं है। उस परिस्थिति में वैश्विक महामारी कोविड-19 का खतरा बढ़ने से रोकना मुश्किल ही नहीं असंभव हो सकता है। उस लिहाज से मेला के आयोजन पर रोक लगाना सही निर्णय प्रतीत होता है। नालंदा डीएम द्वारा मलमास मेला के दौरान होने वाले सभी कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया गया है। परन्तु मलमास मेला (पुरुषोत्तम मास) के पहले दिन वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ ध्वजारोहण करने की अनुमति प्रदान की गई है।
— गर्म जल के कुंडों और नदियों में सामूहिक स्नान पर रहेगी रोक
मलमास मेला के दौरान यहां के मंदिरों में सदियों से चली आ रही पूजा पाठ करने की परंपरा में छूट दी गई है। इसके साथ ही भीड़ न लगाने की हिदायत भी दी गई है। मेला में झुंड बनाकर आने और झुंड के झुंड कुंड स्नान करने पर प्रतिबंध रहेगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार 100 से अधिक लोग पूजा पाठ में शामिल नहीं हो सकते हैं। मान्यता है कि देश-दुनिया में केवल राजगीर के मलमास मेला में ही 33 कोटि देवी – देवता पधारते और एक महीने तक कल्पवास करते हैं।

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