मानसिक स्वास्थ्य के लिए पैसे की तरह बच्चों को समय निवेश करें : डॉ अमरदीप


रिपोर्ट : ब्यूरो राम विलास, नालंदा, बिहार।
नालंदा;-तनाव मनुष्य के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।भागदौड़ भरी जीवन शैली और भौतिक सुख की चाहत में उतार-चढ़ाव के कारण ही मानसिक तनाव पैर पसार रहा है। तनाव मानव के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।यह भारत सहित दुनिया के लिए बड़ी समस्या बन गया है।मानसिक तनाव कई समस्याओं और बीमारियों को जन्म देती है।विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर मानसिक रोग विभाग द्वारा शनिवार को वर्द्धमान आयुर्विज्ञान संस्थान, पावापुरी में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने यह कहा।

इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. पवन कुमार चौधरी ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सतर्क और सजग रहने की जरूरत है।मानसिक रोग पुरी तरह ठीक होने वाली बीमारी है।बशर्ते चिकित्सकों के अनुसार मरीज दवा और व्यवहार करें।मानसिक परेशानी हद पार कर जाती है तभी कोई सोसाइट करता है। भौतिक सुख सुविधा के लिए जिंदगी भागदौड़ की बनकर रह गई है, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए कदापि उपयुक्त नहीं है. प्राचार्य ने कहा कि भारत में प्रत्येक 9-10 में एक व्यक्ति मानसिक समस्या से ग्रसित है।

केंद्र सरकार के रिपोर्ट के अनुसार करीब 10.6 फीसदी मनोरोगी को ईलाज से ठीक किया जा सकता है।डॉ चौधरी ने कहा कि शरीर को मानसिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए नियमित व्यायाम, योग और संतुलित जीवन शैली आवश्यक है।मानसिक रोग विभागाध्यक्ष डॉ अमरदीप कुमार ने इस बर्ष के थीम ‘सबके लिए मानसिक स्वास्थ्य’ विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस तरह अभिभावक बच्चों के भविष्य के लिए धन निवेश करते हैं, उसी तरह अपने बच्चों के लिए कम से कम एक घंटा समय प्रतिदिन निवेश करें।

मानसिक रोग से बचाव का यह अनमोल तरीका है।उन्होंने कहा कि अभिभावक बच्चों के लिए धन खर्च करते हैं, लेकिन उनके लिए समय नहीं निकाल पाते हैं। यही व्यवहार मानसिक स्वास्थ्य के लिए प्रतिकूल है।बच्चों के साथ जितना भावनात्मक लगाव रखेंगे, बच्चे उतना ही स्वस्थ और सफल होंगे।डॉ. अमरदीप ने कहा कि प्रत्येक सात में से एक व्यक्ति मानसिक स्वास्थ्य की समस्या से ग्रसित है।उन्होंने कहा कि वाह्य कारकों जैसे बचपन में हुई शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़ना, यौन उत्पीड़न, लालन – पालन, नशे की लत, इंटरनेट की अत्यधिक आदतें मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।

डॉ अनंत कुमार वर्मा ने मानसिक समस्याओं से जुड़ी मिथकों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानसिक समस्याओं के मरीजों को मानसिक रोग विशेषज्ञ से सलाह लेने पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि कुछ लोग मरीजों को इलाज कराने की जगह झाड़ – फूंक, अनावश्यक महँगी जाँच कराने में विश्वास करते हैं, जो स्वास्थ्य के अनुकूल नहीं है। इस अवसर पर मनोरोग विभाग की ओर से प्राचार्य को रबर पौधा भेंट किया गया।कार्यक्रम का संचालन डॉ. नीलकमल और आगत अतिथियों का स्वागत डॉ ऋतुराज ने किया।कार्यक्रम में डॉ अनंत कुमार वर्मा, डॉ गणेश प्रसाद सिंह, डॉ राजीव सहित कई चिकित्सक, मरीज और उनके परिजन शामिल हुए।

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