योग मन, शरीर और अध्यात्मिकता के बीच सामंजस्य बैठाने का साधन : प्रो सुनैना सिंह

फोटो – वर्चुअल योग योग शिविर में शामिल लोग

रिपोर्ट;ब्यूरो राम विलास,नालंदा।
राजगीर;-कोरोना महामारी के संकट के बीच नालंदा विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर वर्चुअल योग शिविर का आयोजन किया गया।इस शिविर में ऑनलाइन नालंदा विश्वविद्यालय समुदाय के लोग और खास तौर से योग के सर्टिफिकेट कोर्स के छात्र-छात्राएं और योग विशेषज्ञ सुनीश की देखरेख में योगासन किया।इस मौके पर कुलपति प्रो सुनैना सिंह ने कहा कि योग भारत की सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक विरासतों में से एक है।यह दुनिया के लिए भारत की ओर से एक राष्ट्रीय उपहार है।

योग मन, शरीर और आत्मा में सामंजस्य स्थापित करता है।योग मनुष्य के सभी पहलुओं को एकजुट करता है।कोविड महामारी की प्रतिरक्षा बनाने का एक उपाय योग है।योग के महत्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि योग भारत की सांस्कृतिक विरासत है।वह मन मस्तिष्क और शरीर एवं आध्यात्मिक पहलू के बीच सामंजस्य बैठाने का साधन है।योग न केवल अनुशासन के तौर पर स्वस्थ करता है, बल्कि यह सांस्कृतिक मूल्यों को भी बढ़ावा देता है।

योग का प्रत्येक पहलू भारत के बहुत सारे सांस्कृतिक पहलुओं से जुड़ा हुआ है।कोविड-19 महामारी के कारण योग को पिछले एक-डेढ़ साल में अधिक महत्व मिला है।इस बार संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2021 की थीम “कल्याण के लिए योग” तय किया है।विश्वविद्यालय में “संख्या, योग, तंत्र और वेदान्ता : एक तुलनात्मक अध्ययन” के नाम से एक अल्पावधि पाठ्यक्रम भी चलाया जा रहा है।इस पाठ्यक्रम में योग की चार महान प्रणालियों और उनके दर्शन का व्यापक अध्ययन प्रदान किया जाता है।प्रत्येक प्रणाली पर उनके मूल घटकों, अवधि के दौरान विकास, अभ्यास के तंत्र, और योग प्रणालियों पर प्रभाव पर ध्यान केंद्रित करते हुए विस्तार से चर्चा की जाती है।

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