राष्ट्रीय चेतना को जगाने के लिए दिनकर की रचनाएं प्रासंगिक

रिपोर्ट : ब्यूरो, राम विलास, नालंदा, बिहार ।
नालंदा;-राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर और गोपालधाम के अधिष्ठाता गोपालानंद सरस्वती उर्फ जंगलिया बाबा की जयंती गोपालधाम में सादे समारोह में मनाई गई। इस अवसर पर ‘समरस समाज के निर्माण में राष्ट्रकवि दिनकर एवं जंगलिया बाबा का योगदान’ विषय पर वक्ताओं ने अपना विचार व्यक्त किया।मौके पर आध्यात्मिक संत और दिनकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।दिनकर की कालजयी रचना रश्मिरथी का नाट्य मंचन मुंबई के प्रख्यात रंगकर्मी मुजीब खान के निर्देशन में किया गया।वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गोपालधाम में भी नाटक देखा गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. विजय राम रतन सिंह की कविता ‘किसको नमन करूं मैं कविवर, किसको नमन करूं मैं’ से किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि नव नालंदा महाविहार डीम्ड यूनिवर्सिटी, नालंदा के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ श्रीकांत सिंह ने कहा कि देश का भौतिक विकास हो रहा है, लेकिन मानवीय संवेदनाओं का विकास नहीं हो रहा है।उसी संवेदनाओं को जागृत के लिए राष्ट्रकवि दिनकर स्मृति न्यास देश में साहित्य का अलख जगा रहा है।उन्होंने कहा स्वामी गोपालानंद सरस्वती महान व आदर्श संत थे।वे समरस समाज के पोषक थे।संतों की तरह दिनकर भी अन्य कवियों से अलग थे।

उन्होंने कहा कि 19 वीं सदी के पंजाबी कवि इकबाल और नोबेल पुरस्कार से अलंकृत रविंद्र नाथ टैगोर दोनों के बीच के कवि राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर हैं।उन्होंने दिनकर को भारतीय संस्कृति का उन्नायक बताते हुए कहा कि मार्क्सवाद और गांधीवाद के आदर्शों के समन्वय को स्थापित करने में दिनकर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।वह केवल जन – जन के कवि ही नहीं बल्कि समावेशी कवि भी थे। नेतरहाट के रिटायर शिक्षक डॉ मिथिलेश प्रसाद सिंह ने कहा की राष्ट्रकवि दिनकर ने कभी अपनी रचनाओं के माध्यम से पर्वतराज हिमालय को जगाया था।

हिमालय को फिर से जगाने के लिए दिनकर की रचनाएं आज भी प्रासंगिक हैं।द्वारिकाधीश श्री कृष्ण जब राजगीर आए थे, तब गोपालधाम में ठहरे थे।उन्हीं के नाम पर इस स्थान का नाम गोपालधाम रखा गया है।जंगलिया बाबा के स्मृति को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि उनका कृत्य, संदेश और आदर्श आज भी प्रासंगिक है।उन्होंने कहा कि कविता मनुष्य को केवल ऊर्जावान ही नहीं बनाती है, बल्कि जोश भी भर्ती है।उन्होंने कहा कि भारत की चेतना कुंद हो रही है।उसे जगाने के लिए दिनकर की रचनाएं ही सर्वोत्तम है।

कार्यक्रम के आयोजक और राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर स्मृति न्यास के अध्यक्ष नीरज कुमार ने इस अवसर पर कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर की रचनाओं की प्रासंगिकता पहले से अधिक है।वह गांव के गरीब, दलित, किसान, मजदूर और नौजवानों में ऊर्जा भरने वाले कवि थे।दिनकर राष्ट्रीय चेतना के प्रखर और ओजस्वी कवि थे।उनकी रचना में सामाजिक दायित्व और वैश्विक बोध झलकता है। दिनकर की प्रायः सभी रचनाएं कालजयी हैं।उनकी कविताओं में समाज सेवा से देश सेवा के भाव मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि गोपालानंद सरस्वती उर्फ जंगलिया बाबा केवल महान संत ही नहीं थे, बल्कि समरस समाज के निर्माण में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।उन्होंने कहा कि जंगलिया बाबा के विचार और दिनकर के साहित्य में समानता है।वे सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीयता के महान कवि थे।भारतीय संस्कृति- साहित्य के उन्नायक रामधारी सिंह दिनकर जन-जन के कवि थे। समरस समाज के निर्माण में राष्ट्रकवि दिनकर और जंगलिया बाबा का अमूल्य योगदान है। इस अवसर पर प्रो. परमानंद सिंह ने कहा कि गोपालधाम जंगलिया बाबा की देन है।

उन्होंने जंगलिया बाबा को युगपुरुष बताते हुए कहा कि अध्यात्म और समरस समाज के निर्माण क्षेत्र में जिस तरह जंगलिया बाबा का अहम योगदान है। उसी तरह साहित्य के क्षेत्र में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर का अमूल्य योगदान रहा है।वे दो बार राज्यसभा के सदस्य भी रहे हैं। इस अवसर पर गोपालधाम के पुजारी चैतन्यानंद सरस्वती, नरेंद्र कुमार शर्मा, कौशलेंद्र कुमार, परीक्षित नारायण सुरेश, लाल सिंह, रूपेश कुमार, विनय कुमार, अरुण कुमार, प्रशांत कुमार, राजा रंजन सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित थे. डॉ अमित कुमार पासवान ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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