विवेक मुनि महाराज को महामंडलेश्वर बनने से अध्यात्म के क्षेत्र में बढ़ी राजगीर की प्रतिष्ठा

रिपोर्ट : ब्यूरो, राम विलास, नालंदा, बिहार।
राजगीर;-अध्यात्म की आदि भूमि राजगीर में बिहार महामंडलेश्वर स्वामी श्री विवेक मुनि महाराज का नागरिक अभिनंदन बुधवार को किया गया। उदासीन परंपरा की सबसे पुरानी धर्मपीठ बड़ी संगत में आयोजित अभिनंदन समारोह में कई जिलों के संतो महंतों द्वारा महामंडलेश्वर का अभिनंदन किया गया। संतों के बाद नगर वासियों द्वारा महामंडलेश्वर का अभिनंदन किया गया।

अभिनंदन कार्यक्रम में कोई फूल माला, तो कोई चादर दे रहे थे। कोई उनके आगे श्रद्धा अनुसार रूपए पैसे देकर उनका मान सम्मान कर रहे थे। इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी विवेक मुनि महाराज ने नागरिक अभिनंदन करने वाले साधु-संतों, महंतो और धर्म प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया। धर्म प्रेमियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए उन्होंने कहा कि राजगीर उदासीन परंपरा की सबसे पुरानी धर्म स्थल है।

उदासीन परंपरा का विकास और विस्तार यहीं से हुई है। बिहार के धार्मिक प्रतिष्ठानों को पुनर्जीवित करने के लिए साधु समाज को आगे आने की आवश्यकता पर उन्होंने जोर दिया है। तारापुर धर्मपीठ के महंत स्वामी दयानंद सरस्वती ने कहा कि बिहार के धार्मिक प्रतिष्ठान बदहाली के दौर से गुजर रहा है। उनकी बदहाली को दूर करने के लिए संत समाज को मंथन करने की जरूरत है। राजगीर की बड़ी संगत उदासीन संप्रदाय की बिहार राज्य की सबसे पुरानी धर्मपीठ है। पूर्व वार्ड पार्षद उमराव प्रसाद निर्मल ने कहा कि बिहार के 365 मठों में से राजगीर का बड़ीसंगत सबसे श्रेष्ठ धर्मपीठ है। उन्होंने महामंडलेश्वर श्री विवेक मुनि महाराज से सामाजिक कुरीतियों – विकृतियों को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की उम्मीद की ।

कार्यक्रम का शुभारंभ डॉक्टर जयनंदन पांडे के मंगलाचरण से हुआ। इस अवसर पर महर्षि बाल्मीकि को आदि कवि बताते हुए उन्होंने कहा कि संगति से ही मनुष्य में गुण और दोष आते हैं। उन्होंने महामंडलेश्वर से राजगीर तीर्थ को अध्यात्म की ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रेरित किया। मानस मर्मज्ञ भोला प्रसाद सिंह ने कहा कि स्वामी विवेक मुनि को महामंडलेश्वर की उपाधि मिलने से राजगीर की प्रतिष्ठा अध्यात्म के क्षेत्र में बढ़ी है। महामंडलेश्वर की उपाधि संत समाज का सर्वोच्च उपाधि मानी जाती है। उनकी इस उपाधि से राजगीर वासी आनंद के झूले पर झूल रहे हैं।

हरिद्वार के संत स्वामी कालीनंद ब्रह्मचारी ने कहा कि आज का दिन राजगीर के लिए ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि बिहार के बदहाल धर्मपीठों की दशा सुधरने के संत समाज को बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने की जरूरत है। अभिनंदन समारोह के अध्यक्ष महंत द्वारका दास ने कहा कि राजगीर सदियों से अध्यात्म के क्षेत्र में विख्यात रहा है। सर्वधर्म समभाव की इस धरती पर अनेक संत महंत और महात्मा यहां आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में धार्मिक प्रतिष्ठानों की दशा अच्छी नहीं चल रही है। उन्हें फिर से जगाने करने के लिए संत समाज को एकजुट होना चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन मुखिया नबेन्दू झा ने किया। इस अवसर पर गोपाल धाम के महंत सनातन स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती, श्री सुदर्शन जी महाराज, रजौली संगत के महंत शिव दास जी महाराज, संकट मोचन नवादा धर्मपीठ के नारायण देव जी महाराज, नकुलदेव जी महाराज, सुनील दास जी महाराज, श्री उत्तम जी महाराज, अनिता गहलौत, सुधीर उपाध्याय, निर्मल द्विवेदी, रतिकांत झा एवं अन्य ने विचार व्यक्त किया।

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