विश्व जल दिवस : सफाई सौंदर्यीकरण पर नहीं दिया गया ध्यान

फोटो – गाद और गंदगी से भरी सरस्वती नदी

जिस नदी में लोग रोज नहाते थे आज वह निस्तारित लाइक भी नहीं

रिपोर्ट;ब्यूरो राम विलास,नालंदा।
राजगीर;-जल संरक्षण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका नदी, ताल – तलैया, आहार – पोखर और पइन की है।वाबजूद इन पारंपरिक जल स्रोतों की हालत बहुत दयनीय है।सरकार और समाज से उपेक्षित उन जलस्रोतों का वजूद खतरे में है।कभी इन्हीं पारंपरिक जल स्रोतों के पानी का उपयोग लोग नहाने से पीने तक करते थे।लेकिन आज इसमें लोग निस्तारी के लिए भी कतराते हैं।नदी हो या तालाब, पोखर हो या पइन सभी गाद और गंदगी से भरे पड़े हैं।

इसके दो कारण हैं।एक आम लोग इन जलस्रोतों में ही गंदगी फेंकते हैं।दूसरी ओर सरकार द्वारा उन गादों की सफाई और उड़ाही नहीं कराई जाती है।गांव और शहर के नालों के गंदे पानी इन्हीं जल स्रोतों में बहाए जाते हैं।राजगीर के पास पैमार, पंचाने और सकरी जैसी तीन प्रमुख सुरसर नदियाँ हैं।ये सभी सरस्वती पूजा के पहले ही जलहीन हो जाती है।अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन केंद्र राजगीर में ब्रह्मकुंड क्षेत्र से गुजरने वाली धार्मिक नदी सरस्वती ऐसे ही उपेक्षित नदियों में एक है।

इस नदी में पानी कम घास फूस और गंदगी अधिक है।पहले गर्मी के दिनों में सरस्वती नदी के शीतल जल में लोग रोज स्नान करते और शरीर की गर्मी दूर भगाते थे।हर तीन साल पर लगने वाले मलमास मेला में पहला स्नान करने की परंपरा सरस्वती नदी की ही है।बावजूद यह घनघोर उपेक्षा का शिकार है।जिस तरह सरकार को इसके वजूद बचाने की कोई चिंता नहीं है।उसी तरह यहां के सामाजिक संगठनों और सभी स्तर के जनप्रतिनिधियों की भी कोई रुचि नहीं है।

इसके वजूद की रक्षा के लिए न तो कोई वार्ड पार्षद आगे आ रहे हैं और न ही विधायक- सांसद।यही हाल प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के समकालीन 52 तालाबों की है।ये 52 तालाब भी सरकारी उपेक्षा के शिकार हैं।इनमें अधिकांश के वजूद संकट में हैं।कई गाद से भर गए हैं, तो कई अतिक्रमण के शिकार भी हैं।बावजूद यहां के प्रशासनिक पदाधिकारी लापरवाह दिख रहे हैं।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन हरियाली योजना से इन प्राचीन तालाबों के जीर्णोद्धार की आस जगी थी।

उम्मीद जगी थी कि हजारों साल पुराना इतिहास पुनर्जीवित होगा।लेकिन लघु सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन की उपेक्षा से नालंदा विश्वविद्यालय के समकालीन तालाब इस महत्वाकांक्षी योजना से अब भी मरहूम है।राजगीर के सरस्वती और वैतरणी नदी से पंडितपुर और चक पर जाने वाली पइन की हालत सरस्वती नदी जैसी ही है।आसपास के लोगों द्वारा बड़े पैमाने पर इस पइन का अतिक्रमण किया गया है।अतिक्रमण के कारण इसका जल प्रवाह बंद हो गया है।मामला विधान परिषद में भी उठाया गया है।इसके बाद भी अतिक्रमण हटाने की बात तो दूर रही राजगीर के सीओ द्वारा अब तक पइन की नापी तक नहीं कराई गई है।यही हाल प्रखंड के लहुआर गांव के पइन की है।

Comments are closed.