विश्व धरोहर का मिला दर्जा फिर भी नहीं बदली तस्वीर

फोटो  – नालंदा धरोहर
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रिपोर्ट;-ब्यूरो राम विलास राजगीर।
नालंदा ;-विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के चार साल बाद भी ज्ञान भूमि नालंदा की तस्वीर में कोई बदलाव नहीं हुई है। बफर जोन की तरह वेंडिंग जोन का निर्माण भी चार साल में नहीं हो सका है. इसी प्रकार सैलानियों को ठहरने के लिए अबतक एक अदद होटल- मोटल का निर्माण आजादी के 73 साल बाद भी नहीं हो सका है. सार्वजनिक शौचालय और पीने के पानी की सुविधा से यहां आने वाले सैलानी मरहूम रहते हैं. प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष को विश्व धरोहर का दर्जा तो मिल गया है. लेकिन इसके रखरखाव के लिए देश के अन्य विश्व धरोहरों की तरह आवंटन नहीं दिया जाता है. सीमित संसाधनों में किसी तरह इसका रखरखाव किया जाता है. बीसवीं सदी की तरह 21वीं सदी में भी नालंदा विकास के लिए तड़प और तरस रहा है. विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद नालंदा में बफर जोन का निर्माण, वाहन पार्किंग, वेंडिंग जोन, ड्रेनेज आदि का निर्माण किया जाना है. लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के कारण एक भी काम नहीं हो सका है. धरोहर को सहेजने के लिए आज भी उतना ही धन मिलता है, जितना दर्जा मिलने के पहले मिलता था.  केवल चार स्मारक रक्षक के भरोसे विश्व धरोहर साइट की देखभाल की जाती है, जबकि धरोहर की देखभाल, साफ-सफाई, घास – फूस और पेड़ – पौधों की निराई- कटाई के लिए दो दर्जनों से अधिक कर्मियों की जरूरत है. विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद  सरकार को सैलानियों के लिए विश्व स्तरीय बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करानी थी. लेकिन अब तक कुछ नहीं हो सका है. यहां पीने के पानी से लेकर सार्वजनिक शौचालय तक की गंभीर समस्या है. धरोहर प्रवेश द्वार के इर्द-गिर्द फुटपाथ पर सैकड़ों दुकानें लगाई जाती है, जो विश्व धरोहर की गरिमा के अनुकूल नहीं है. नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष को देखकर और उसके गौरवशाली इतिहास को जानकर दुनिया के सैलानी दांतो तले उंगली दबाते हैं. लेकिन धरोहर की दीवारों पर उगे हरे हरे घास -फूस, पेड़ -पौधे देखकर सैलानियों को निराशा होती है. नालंदा में सैलानियों को ठहरने के लिए पांच सितारा होटल की बात तो दूर, एक साधारण होटल – मोटल  तक नहीं है. पर्यटक चाह कर भी यहां रात्रि विश्राम नहीं कर पाते हैं. सैर सपाटा करने के बाद वे राजगीर या बोधगया  वापस लौटने के लिए मजबूर हैं. यहां की झोपड़ी नुमा चाय नाश्ते की दुकानें सैलानियों के स्वागत में तत्पर रहते हैं. विश्व धरोहर के मानक अनुसार पार्किंग स्थल नहीं होने के कारण सड़क पर ही यहां पर्यटक वाहनों की पार्किंग कराई जाती है और उससे पार्किंग टैक्स वसूली की जाती है।
— अधिकारी बोले
सीमित संसाधन और स्टाफ से काम किया जा रहा है. धरोहर के विकास के लिए सभी आवश्यक कार्य किये जा रहे हैं। बफर जोन, वेंडिंग जोन, पार्किंग स्थल आदि का निर्माण पुरातत्व विभाग को नहीं सरकार को करनी है.एएच नायक, अधीक्षण पुरातत्वविद्, ए एस आई सर्किल, पटना।

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